Hindi Kavita –
पानी के बिना नदी बेकार है,
अतिथि के बिना आंगन
बेकार हैं, बेकार है।
प्रेम ना हो तो सगे-संबंधी
पैसा न हो तो पॉकेट बेकार है।
और जीवन में गुरु न हो
तो जीवन बेकार है।
इसलिए जीवन में गुरु
जरूरी है, गुरुर नहीं।
————————————————
यदि आपको भी कहानी, कविता, गीत व गजल लिखने का शौक है तो उठाइए कलम और अपने नाम व पासपोर्ट साइज फोटो के साथ भेज दीजिए। चेतना मंच की इस ईमेल आईडी पर-
chetnamanch.pr@gmail.com
हम आपकी रचना को सहर्ष प्रकाशित करेंगे।
देशविदेश की खबरों से अपडेट रहने लिए चेतना मंच के साथ जुड़े रहें।देश-दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमें फेसबुकपर लाइक करें या ट्विटरपर फॉलो करें।