Hindi Kavita –
सोचा था संवारेंगे तुझे ऐ !
ज़िन्दगी,
देकर तुझे स्वप्नों के कुछ नए रंग।
पर तुझको सवांरते, और तुझको निखारते,
न जाने कितने दिन बीत गए ऐ!
ज़िन्दगी।
आज सोचा तो जाना, जो जीते थे अब तक...
वो ज़िन्दगी नथी।
जिसको सवारते, जिसको निखारते,
न जाने कितने दिन बीत गए ऐ!
ज़िन्दगी ।
जिंदगी के मायने भी, उस मोड़ पर समझ आए।
जिसको संभालते, जिसको स्वीकारते,
न जाने कब बीत गयी ऐ!
ज़िन्दगी ।
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