Hindi Kavita –
कोई जगह होगी, जहाँ से न जाना होगा,
इस परिंदे का कहीं तो आशियाना होगा।
न जाने किस शय का मुन्तज़िर है अब,
न जाने किस ओर अब ठिकाना होगा।
कई चेहरों सा दिखने लगा है अब चेहरा,
शायद इसलिए उसने न पहचाना होगा।
देख कर मुझे भी उतनी ही हैरत होती है,
आईना भी मेरी तरह बहोत पुराना होगा।
अब तू ही कुछ बोल बेचैन दिल मेरे,
क्या फिर से मुझे सब कुछ बताना होगा?
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