
ए खुदा मुझे फिर वही मां देना, फिर वही गोद और उसी का आसरा देना। खेला हूं जिसकी गोद में, सोया हूं जिसकी गोद में, सीखा है जिसकी उंगलियों को पकड़कर चलना फिर उसी उंगलियों का सहारा देना, ए खुदा मुझे फिर वही मां देना। आंचल में छुपाया है जिसने, धूप को छाया बनाया है जिसने, जिस आंचल से पूछा करती थी अक्सर वो मेरे पसीने, जब आता था मैं थक कर घर में, फिर उसी आंचल का एहसास देना, ऐ खुदा मुझे फिर वही मां देना।
———————————————— यदि आपको भी कहानी, कविता, गीत व गजल लिखने का शौक है तो उठाइए कलम और अपने नाम व पासपोर्ट साइज फोटो के साथ भेज दीजिए। चेतना मंच की इस ईमेल आईडी पर- chetnamanch.pr@gmail.com हम आपकी रचना को सहर्ष प्रकाशित करेंगे।