Hindi Kavita –
बिना बताये वो हर बात जानते है,
मेरे पिता मेरी हर बात मानते है।
अब पिता के लिए क्या ही लिखूं,
पिता ने खुद मुझे लिखा है।
अगर जीवन में हो पिता का साया,
तो इससे अच्छा नहीं कोई पर छाया।
एक पिता ही है जनाब जिसने दोस्त की तरह समझाया,
जिससे कभी न अपने बच्चो मे कभी ऊँचा नीचा दिखलाया।
बाप, पिता, पापा से है इनकी पहचान।
संघर्ष है इन्होंने किये, सिर्फ अपने परिवार और बच्चो के लिए।
सब कुछ सह जाते है पापा,
पूरी करने को इच्छा हमारी।
यह पिता वो है जो बेटी के होने पर,
और उसे खुशी से खर्च कर जाते है।
दुनिया को खिलता है मिठाई ।
यह पिता वो है जो अपनी औलाद के लिए उम्रभर कमाते है।
• दीपशिखा शर्मा
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