Hindi Kavita –
श्रावण सा हर मास
तुम्हारा मधुमास बने...
स्वपन निशा के
जीवन असीम आकाश बने ...
डगर-डगर जिस पर पग रखो..
जुगनू से दीप जले,
किरण कामिनी का उजियारा,
सतरंगी पग-पग संग चले..
दिवस रुपहला ..
निशा बसन्ती...
ऊषा सी सांझ ढले ..
विवेक राजपूत
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