Hindi Kavita
तेरे आने की खबर कहीं से आती,
उजड़े चमन में बाहर आ जाती।
बस इतनी सी गुजारिश है,
पल भर ही झलक मिल जाए,
घर में तेरे कदम पड़ जाऐं,
तू भी हमसे नजर मिलाए।
तेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा सनम!
मेरे भाग फिर संवर जाएं।
तेरे अहसान मुझपे ढ़ेरों हैं,
पर मेरे भी कमतर तो नहीं!
उन अहसानों का वास्ता है तुझे
मेरा यकीं न टूटने पाए।
जाने वाले को रोका किसने ?
पर आने के भी सौ बहाने हैं,
जिसमे मेरा जिस्म जलता है,
उसमें तेरे भी तो ठिकाने हैं।
तिजारत ए जिन्दगी में,
हमें अपनी कसम!
जी भर सुकून पाया है,
तूने कुछ कमी न छोड़ी फिर भी
घिर आया ग़म का साया है।
आज इम्तहान मेरे इंतजार का होगा ,
गर न आए तो इश्क़ फना होगा।
डॉक्टर नीरजा उपाध्याय
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