Hindi Kavita - हास्य कविता
नेता हो इस सदी के,
सच्चाई की डगर पे बच्चों न पैर धरना,
नेता हो इस सदी के, तुम झूठ से न डरना।।
थाली में खाओ जिसमें उसमें ही छेद करना।
जैसा कहो न करना, कहके सदा मुकरना,
धरती पे पग न धरना,धरना सदा ही करना।
नेता हो इस सदी के, तुम झूठ से न डरना।।
एंक्रोचमेंट करना, करना सदा घोटाले,
करतूत जिनकी काली, सारे तुम्हारे साले।
वे जाएं जेल, उनके बच्चों के पेट भरना।
नेता हो इस सदी के, तुम झूठ से न डरना।।
बोलोगे झूठ जितना उतना ही नाम होगा,
नीचे गिरोगे जितना, ऊंचा मुकाम होगा।।
कीमत बढ़ानी हो तो स्टोर खूब करना।
नेता हो इस सदी के, तुम झूठ से न डरना।।
एका हो बीच उनके जाकर के फूट डालो,
अच्छा जहां हो जाके कीचड़ वहां उछालो।
जिनकी फसल हो अच्छी,उनके ही खेत चरना।
नेता हो इस सदी के, तुम झूठ से न डरना।।
जनता को मुफ्त दारू,मुर्गा उन्हें खिलाओ,
ब्रह्मास्त्र है चुनावी, इसको ही आजमाओ।
नुस्खा है जीत का यह, इसका प्रयोग करना।
[caption id="attachment_78632" align="alignnone" width="234"] Baba Kanpuri[/caption]
हास्य कवि बाबा कानपुरी