Hindi Kavita –
वो आया था,
अजनबी बन कर,
मेरी ज़िंदगी में...,
पर
कब अपनों से बढ़ कर भी
अपना बन गया,
पता ही नहीं चला...!
हज़ारों सपने देखे हैं,
मैंने जिंदगी में,
पर कब वो,
सबसे हसीन सपना बन गया,
पता ही नहीं चला...!
रखती थी खुद का ख्याल,
इस ज़िंदगी में,
पर न जाने कब,
खुद का ख्याल,
उसका ख्याल बन गया,
पता ही नहीं चला...!
मैं टूटीं हूं जिंदगी में
कई बार मुश्किलों के आगे,
पर उसके आते ही,
मेरा टूटना कब बन्द हो गया,
पता ही नहीं चला...!
है मुझ मे अनेकों खामियाँ,
पर खामियों के बाद भी,
उसका मुझे अपनाना,
कब प्यार करना बन गया,
पता ही नहीं चला...!
वो आया था
एक अजनबी बन
मेरी जिंदगी में,
पर अपनों से भी ज्यादा,
अपना बन गया,
पता ही नहीं चला...!
डा. एस.एस. दास
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