
Real Estate : आज के समय में जहां महानगरों में घर खरीदना आम आदमी के लिए एक आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है, वहीं देश के टियर-2 शहरों में लोग अपेक्षाकृत सुकून और संतुलित जीवन जी रहे हैं। घर की खरीददारी को लेकर 'होम फर्स्ट फाइनेंस' द्वारा किए गए हालिया सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि छोटे शहरों में न केवल मकान अधिक किफायती हैं, बल्कि लोगों की जीवनशैली और मानसिक संतुलन पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ा है।
सर्वे में शामिल अधिकांश मेट्रो सिटी निवासियों ने माना कि घर खरीदने के बाद बढ़ती EMI, महंगा रख-रखाव और दिन-ब-दिन ऊंचे होते जीवन-स्तर की वजह से उनकी मासिक आय पर गंभीर दबाव पड़ा है। सर्वे के अनुसार, जिन परिवारों ने आर्थिक तनाव और वित्तीय जिम्मेदारियों की बात कही, उनमें से 58 प्रतिशत महानगरों से थे। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में दो बेडरूम फ्लैट की कीमतें अब औसतन 1.7 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुकी हैं। दिल्ली - NCR में हालात और भी ज्यादा गंभीर हैं। यदि कोई व्यक्ति दो लाख रुपये की मासिक आय पर 2BHK फ्लैट खरीदता है, तो स्कूल फीस, घर की किस्त और अन्य खर्चों के चलते उसके लिए बचत करना लगभग असंभव हो जाता है।
वहीं दूसरी ओर, टियर-2 शहरों की तस्वीर काफी अलग है। यहां घरों की कीमतें तुलनात्मक रूप से काफी कम हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बिना समझौता किए मासिक किस्तें चुकाना आसान हो जाता है। सर्वे के अनुसार, छोटे शहरों में रहने वाले 50 प्रतिशत लोगों की घरेलू आय घर खरीदने के बाद बढ़ी है और 56 प्रतिशत ने अपनी बचत में इजाफा दर्ज किया है। सर्वे में शामिल 51 प्रतिशत घर खरीदारों ने कहा कि घर खरीदने के बाद उन्हें मानसिक शांति, सुरक्षा और स्थिरता का अनुभव हुआ। किराए की अनिश्चितता, मकान मालिक की दखलअंदाजी और बार-बार घर बदलने की मजबूरी से मुक्ति ने उन्हें जीवन की दीर्घकालिक योजना में आत्मविश्वास दिया है। परिवार अब शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की योजनाओं में खुलकर निवेश कर पा रहे हैं। Real Estate