Honor Killing : लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश
Distt Court Gautam Budhnagar
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 02:22 PM
Honor Killing : आनंदपुर निवासी गौरव की सोशल मीडिया के जरिए युवती से दोस्ती हुई थी। युवती गुर्जर जाति, जबकि गौरव दलित जाति का था। गौरव के दलित होने का पता चलने पर युवती व उसके परिजनों ने उसे मौत के घाट उतारा था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि गौरव ने सोशल मीडिया पर गौरव गुर्जर के नाम से अपना स्टेटस लगा रखा था। युवती ने गौरव को गुर्जर समझ कर दोस्ती की थी। उसे जब पता चला कि गौरव गुर्जर नहीं, बल्कि दलित जाति से है तो उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर उसकी हत्या करने का कदम उठाया था।
Honor Killing :
प्रेमिका व उसके परिजनों द्वारा पिटाई के बाद जहर पिलाकर युवक की हत्या किये जाने की जांच में पुलिस द्वारा घोर लापरवाही बरतने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले की विवेचना कर रहे एसीपी द्वारा समय पर चार्जशीट दाखिल न किए जाने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट गौतमबुद्धनगर ज्योत्स्ना सिंह ने पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह को पत्र लिखकर मुकदमे के विवेचक एसीपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
Honor Killing :
बता दें कि थाना दादरी क्षेत्र के ग्राम आनंदपुर निवासी 25 वर्षीय गौरव पुत्र जतन पाल को उसकी प्रेमिका ने गत 23 मई को पल्ला नहर पर मिलने के लिए बुलाया था। गौरव की प्रेमिका व उसके परिजनों ने उसके साथ मारपीट की और उसे जबरन जहर पिला दिया। गौरव को मरा समझकर उसकी प्रेमिका व परिजन मौके से फरार हो गए थे। इस दौरान जानकारी मिलने पर गौरव के परिजन मौके पर पहुंचे और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान गौरव ने वीडियो बनाकर बयान दिया कि उसकी प्रेमिका ने उसे फोन कर कपड़े दिलाने के बहाने दादरी बुलाया था। जैसे ही वह दादरी बाजार में पहुंचा तो उसकी प्रेमिका उसे पल्ला नहर पर ले गई। गौरव ने बताया कि यहां उसकी प्रेमिका के भाई व परिजन पहुंच गए और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। सभी लोगों ने उसे जबरन जहर पिला दिया और मरा समझकर फरार हो गए। इलाज के दौरान दो दिन बाद गौरव की मौत हो गई थी।
गौरव के पिता ने रिंकी, कुणाल, साहिल समेत आठ लोगों के खिलाफ थाना दादरी में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में कुणाल, साहिल व रिंकी को गिरफ्तार किया था। इस मामले की विवेचना तत्कालीन एसीपी नितिन कुमार सिंह कर रहे थे। घटना के 90 दिन बीतने के बाद भी एसीपी द्वारा इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी।
इस मामले में न्यायाधीश ज्योत्स्ना सिंह ने पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा है कि दलित युवक की हत्या के मामले में तत्कालीन विवेचक एसीपी नितिन कुमार सिंह ने 60 दिनों के बाद भी अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल नहीं किया। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा- 4(2) उपधारा-1(ड) में यह प्रावधान है कि मामले का अन्वेषण कर 60 दिन की अवधि के अंदर आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय अथवा अनन्य रूप से विशेष न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाए। इस मामले में यदि कोई देरी होती है तो उसके बारे में भी विवेचक को लिखित रूप में स्पष्ट करना होगा। पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि मुकदमा पंजीकृत होने के 90 दिन से अधिक का समय बीतने के पश्चात भी विवेचक एसीपी नितिन कुमार सिंह द्वारा अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित नहीं किया गया। इसके अलावा उनके द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने में विलंब के संबंध में भी कोई लिखित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
न्यायाधीश ज्योत्स्ना सिंह ने कहा कि विवेचक एसीपी नितिन कुमार सिंह का यह कृत्य घोर आपत्तिजनक है। संवेदनशील मामले में विवेचक एसीपी द्वारा बरती जा रही लापरवाही, उदासीनता व राजकीय कार्य के प्रति दिखाई जा रही उपेक्षा को परिलक्षित करता है। पत्र में उन्होंने पुलिस आयुक्त से कहा है कि वह उक्त प्रकरण में स्वयं संज्ञान लेते हुए एसीपी नितिन कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करना सुनिश्चित करें और की गई कार्रवाई से न्यायालय को भी अवगत कराएं।