
देश में GST (Goods and Services Tax) प्रणाली में सुधार की दिशा में बड़ा फैसला सामने आने वाला है। बुधवार और गुरुवार को होने वाली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में यह तय होगा कि टैक्स स्लैब में बदलाव और छूट का फैसला आखिरकार केंद्र सरकार करती है या राज्यों का दबदबा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से संबोधन में जीएसटी सुधार की दिशा की अहमियत बताई थी, और अब इस दो दिवसीय बैठक पर उद्योग, कारोबार और आम जनता की नजरें टिकी हैं। इस बैठक में चार स्लैब को घटाकर केवल दो करने और टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होगी। ऐसे में ये जानना बहुत जरुरी हो जाता है कि GST में छूट और टैक्स स्लैब का फैसला आखिरकार कौन करता है—केंद्र या राज्य? GST COUNCIL MEETING 2025
जीएसटी काउंसिल देश में वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े नीतिगत निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच कर नीति में समन्वय स्थापित करना और जीएसटी से जुड़ी महत्वपूर्ण नीतियों को अंतिम रूप देना है। काउंसिल के अध्यक्ष देश के वित्त मंत्री होते हैं, वर्तमान में यह जिम्मेदारी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास है। इसके अलावा काउंसिल में केंद्र सरकार के नामित मंत्री और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री सदस्य होते हैं। कुल मिलाकर काउंसिल में 33 सदस्य हैं—31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और 2 केंद्र सरकार के प्रतिनिधि।
जीएसटी काउंसिल में फैसले आम तौर पर सर्वसम्मति से होते हैं। यदि कोई प्रस्ताव जटिल हो, तो वोटिंग की जाती है। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए 75% बहुमत जरूरी है। कुल वोटों में केंद्र सरकार का हिस्सा 33% है, जबकि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का संयुक्त हिस्सा 66.67% है। इसका मतलब है कि किसी प्रस्ताव को पारित करने के लिए केंद्र को अपने पक्ष में कम से कम 20-21 राज्यों का समर्थन चाहिए। इसी तरह, यदि केंद्र किसी प्रस्ताव का विरोध करता है, तो राज्यों को 75% बहुमत हासिल करने के लिए लगभग 27-28 राज्यों का समर्थन चाहिए। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी निर्णय में केंद्र या राज्य अकेले प्रभावी नहीं हो सकते।
काउंसिल केवल टैक्स दरें तय नहीं करती, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व वितरण, राज्यों के घाटे की भरपाई और किसी वस्तु या सेवा पर टैक्स लगाने या न लगाने जैसे मामलों का निर्धारण भी करती है। हालांकि, राज्यों को काउंसिल के निर्णय लागू करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक जैसे कुछ राज्य अक्सर काउंसिल से पारित प्रस्तावों पर आपत्ति जताते हैं और उन्हें अपने राज्यों में लागू नहीं करते।
1 जुलाई 2017 को लागू हुए जीएसटी ने देश में 'एक देश, एक टैक्स' का सपना साकार किया। इसके पहले अलग-अलग राज्यों में समान वस्तु और सेवा पर अलग-अलग टैक्स लगता था, जिससे व्यवसायियों को मुश्किलें होती थीं। जीएसटी ने इसे समाप्त कर दिया और पूरे देश में एक समान कर प्रणाली लागू की। इस बार बैठक में टैक्स स्लैब को आसान बनाने की संभावनाएं हैं। वर्तमान में चार स्लैब—5%, 12%, 18% और 28%—चल रहे हैं, जिन्हें घटाकर केवल दो स्लैब (5% और 18%) करने का प्रस्ताव है। इसके तहत आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं 5% स्लैब में आएंगी, जबकि बाकी वस्तुएं 18% स्लैब में शामिल होंगी। हालांकि कुछ राज्यों ने राजस्व घटने का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव का विरोध भी जताया है। GST COUNCIL MEETING 2025