इंडिया जैसे देशों में ये खतरा और बड़ा है, क्योंकि यहां थर्ड पार्टी ऐप्स और जल्दी डाउनलोड कल्चर बहुत आम है। क्रिमिनल्स को बस इतना करना होता है कि एक ऐप में दो-तीन चमकदार फीचर डाल दो और बाकी का काम यूजर खुद कर देता है।

Mobile Phone Spying : वर्तमान युग में मोबाइल फोन हर किसी का खास सहयोगी है। इस जमाने में मोबाइल फोन के बिना कोई भी काम संभव नहीं है। यही कारण है कि मोबाइल फोन जीवन का सबसे खास सहयोगी बन गया है। अब यदि आपको यह पता चले कि आपका सबसे खास सहयोगी आपका सबसे बड़ा जासूस बन गया है तो चिंता हो जाएगी। यह सच है कि आपके हाथ तथा जेब में मौजूद मोबाइल फोन लगातार आपकी जासूसी कर रहा है। मोबाइल फोन में मौजूद ऐप आपकी जिंदगी को खुली किताब बनाकर वर्चअल दुनिया में पहुंचा रहा है।
मोबाइल फोन ने मार्केट में ऐसे सैकड़ों ऐप्स मौजूद हैं जो खुद को फ़ोन क्लीनर, वीडियो कन्वर्टर, फाइल मैनेजर, नोटिफिकेशन बूस्टर या वॉलपेपर ऐप बनकर पेश करते हैं। नाम और आइकॉन इतने सिंपल होते हैं कि किसी को शक ही नहीं होता। लेकिन जैसे ही इन्हें इंस्टॉल किया जाता है, ये फोन से स्क्रीन रिकॉर्ड कर लेते हैं, कीबोर्ड के बटन यानी कीस्ट्रोक्स नोट कर लेते हैं, बैंकिंग ऐप पर ओवरले बना लेते हैं, और चुपचाप आपके फोन की हर चलती गतिविधि बाहर भेजने लगते हैं। सबसे खतरनाक हिस्सा ये है कि ये ऐप्स हटाने पर भी पूरी तरह से फोन से नहीं हटते हैं। कई बार ये खुद को छुपाकर बैकग्राउंड में बने रहते हैं और यूजऱ समझता है कि खतरा खत्म हो गया, जबकि असल में खेल तब शुरू होता है।
आपके फोन में मौजूद ऐप अपने आपको यूटिलिटी बताकर ऐसे परमिशन्स लेते हैं जिनकी उन्हें असल में जरूरत ही नहीं होती। मिसाल के तौर पर एक सिंपल फोटो एडिटर ऐप को एसएमएस पढऩे या नोटिफिकेशन एक्सेस की जरूरत ही नहीं है, लेकिन लोग जल्दी में ओके दबा देते हैं। यही एक क्लिक आपके फोन का कंट्रोल किसी अंजान सर्वर को सौंप देता है। एक और वजह है। ये ऐप्स धीरे-धीरे काम करते हैं। एकदम से कोई बड़ा फ्रॉड नहीं करते। पहले आपके कॉन्टैक्ट लिस्ट की कॉपी जाती है, फिर लोकेशन, फिर ब्राउजिंंग हिस्ट्री। क्रिमिनल्स पूरा प्रोफाइल बनाते हैं, और फिर सही टाइम देखकर बैंकिंग अटैक करते हैं। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि मोबाइल मैलवेयर के केस पिछले कुछ महीनों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। लाखों फोन ऐसे दिखने में साधारण ऐप्स के ज़रिए ट्रैक हुए हैं। कई यूज़र्स को तब पता चला जब उनके बैंक अकाउंट से बिना ओटीपी के पैसे निकल गए, या उनके फोन में लॉगिन अलर्ट्स आने लगे जबकि फोन उनके हाथ में था। इंडिया जैसे देशों में ये खतरा और बड़ा है, क्योंकि यहां थर्ड पार्टी ऐप्स और जल्दी डाउनलोड कल्चर बहुत आम है। क्रिमिनल्स को बस इतना करना होता है कि एक ऐप में दो-तीन चमकदार फीचर डाल दो और बाकी का काम यूजर खुद कर देता है।
आपको मोबाइल फोन आपको चेतावनी भी देता है किन्तु आप उस पर ध्यान नहीं देते हैं। अनेक मामले ऐसे हैं जब आपके फोन में मौजूद ऐप बैकग्राउंड में इतने एक्टिव रहते हैं कि फोन गर्म होने लगता है, बैटरी जल्दी खत्म होने लगती है, और डेटा यूज़ अचानक बढ़ जाता है। परेशानी ये है कि यूजऱ इसे फोन पुराना हो गया है कह कर टाल देते हैं। जबकि सच ये है कि आपके फोन की बैटरी आप नहीं, बल्कि कोई और इस्तेमाल कर रहा होता है। स्पाइवेयर सिर्फ बैंक का पैसा नहीं उड़ाते, वो आपकी पहचान चुरा लेते हैं। आपके फोन में जो कुछ है. ईमेल, फोटो, दस्तावेज़, चैट बैकअप, कॉन्टैक्ट, इन सबका इस्तेमाल करके अपराधी आपके नाम पर नए अकाउंट खोल सकते हैं, नंबर रजिस्टर कर सकते हैं या किसी दूसरे को धोखा दे सकते हैं। मतलब नुकसान सिर्फ आज का नहीं, महीनों तक पीछा करता है। इस कारण यह जरूरी है कि कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले सावधानी जरूर बरतें। Mobile Phone Spying