देश की पहली विकलांग IAS, जिसने हासिल की UPSC में पहली रैंक
IAS Ira Singhal
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:40 AM
IAS Ira Singhal : 'कौन कहता है आसमाँ में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों' दुष्यंत कुमार की यह कविता हर उस UPSC के उम्मीदवार पर सटीक बैठती है, जो अपने कड़े प्रयासों से इस परीक्षा में सफलता हासिल कर अपना IAS या IPS बनने का सपना पूरा करता है। हर साल लाखों उम्मीदवार UPSC की परीक्षा में हिस्सा लेते हैं, जिनमें से केवल कुछ ही उम्मीदवार होते हैं, जो इस परीक्षा में सफल हो पाते हैं। लेकिन कई बार सफलता मिलने के बाद भी कुछ उम्मीदवारों को अपने हक के लिए मेहनत करनी पड़ी जाती है। ऐसा ही कुछ सफर रहा आईएएस इरा सिंघल का। जिन्हें बेशक अपने पहले प्रयास में सफलता हासिल कर ली, लेकिन अपने दिव्यांग होने के चलते उन्हें UPSC में सफल होने के बाद भी कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
कौन है IAS इरा सिंघला ?
देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली इरा सिंघल (IAS Ira Singhal) बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छी थी। लेकिन इरा बचपन से ही स्कोलियोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में जहां लोग आम लोगों की तरह जीना ही छोड़ देते है, वहीं इरा ने इस बिमारी से हार न मानने की कसम खाई। इरा सिंघल ने अपने शुरुआत पढ़ाई मेरठ के सोफिया गर्ल्स स्कूल से पूरी की। जिसके बाद इरा सिंघल अपने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गई और यहां उन्होंने नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसका साथ ही उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।
इस तरह लिया IAS बनने का प्रण
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद इरा सिंघल ने एक बड़ी कन्फेक्शनरी फर्म में स्ट्रैटेजी मैनेजर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। अपने सफर के बारे में इरा का कहना है कि वो अपनी जॉब में खुश तो थी, लेकिन वह देश के लिए कुछ कर नहीं पा रही थी। इस जॉब से उन्होंने पैसे जरूर कमाए पर उनकी इस मेहनत से किसी की ज़िन्दगी में कोई बदलाव नहीं आया। यही बात सोच कर वह हमेशा ही परेशान रहती थी। इस परेशानी से बाहर निकला का तरीका उन्हें तब मिला, जब उन्हें उनका बचपन का सपना याद आया। दरअसल जब इरा सिंघल 7 या 8 साल की थी, तो मेरठ में दंगों के चलते काफी दिनों तक कर्फ्यू लगा रहता था। इस दौरान इरा ने लोगों को डीएम के बारे में बात करते सुना था। लोग हमेशा यही कहते थे कि डीएम (DM) ही कर्फ्यू लगाते हैं। तब उन्हें डीएम की शक्ति और ज़िम्मेदारियों के बारे में जानकारी हासिल की और उसी दिन इरा ने ठान लिया कि वो बड़ी हो कर एक डीएम ही बनेंगी।
IAS Ira Singhal
कड़े संघर्षों के बाद हुआ सपना पूरा
फिर क्या था इरा सिंघल ने ठान लिया की वह अपने बचपन का सपना पूरा करके ही रहेगी। लेकिन यह सफर इरा के लिए इतना असान नहीं था। साल 2010 में इरा सिंघल ने अपना UPSC का पहला अटेम्प्ट दिया। अपने पहले ही अटेम्प्ट में इरा सफल रही, लेकिन इससे उनका IAS बनने का सपना पूरा नहीं हो सका। जिसके बाद इरा ने साल 2011 और 2013 में भी प्रयास किया लेकिन इस बार भी उन्हें IRS की पोस्टिंग दी गई। लेकिन इसमें भी वह काम नहीं कर सकती थी, क्योंकि इरा 62% लोकोमोटर विकलांग थी, जिस वजह से उन्हें पोस्ट ज्वाइन नहीं करने दिया गया। इन सभी परेशनियों से इरा ने हार नहीं मानी बल्कि उन्होंने आयोग के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में मुकदमा दायर कर दिया। लेकिन यह काम भी इतना असान नहीं था, इसके लिए भी उन्हें बहुत धैर्य और संघर्षों का सामना करना पड़ा।
सबसे पहले इरा ने अपनी रैंक को सुधार। साल 2014 में इरा अपने मेन्स परीक्षा की तैयारियों में लगी हुई थी कि उससे पहले ही उनके केस का फैसला आ गया, जिसमें उन्हें सफलता मिली। इसके साथ ही इरा ने साल 2014 की UPSC परीक्षा में सामान्य श्रेणी में टॉप रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाली इरा सिंघल पहली विकलांग उम्मीदवार थी, जिसने सामान्य वर्ग से पहली रैंक हासिल की। इस सफलता के साथ ही इरा ने अपने बचपन के IAS बनने के सपने को भी सच कर दिया। अपनी इस सफलता पर इरा का कहना है कि देश की सेवा करने की उनकी इच्छा के कारण यह सब हुआ।
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