IAS Training Rules: पिछले पांच वर्षों में कई IAS प्रोबेशनर ट्रेनिंग के दौरान अलग-अलग परीक्षाओं में फेल हुए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर कोई ट्रेनी आईएएस अधिकारी ट्रेनिंग के दौरान परीक्षा पास नहीं कर पाता तो क्या उसकी नौकरी चली जाती है? आइए समझते हैं।

देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में शामिल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Civil Services Exam) पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं लेकिन बेहद कम अभ्यर्थी ही आईएएस (IAS) बनने का मौका हासिल कर पाते हैं। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि UPSC पास करने के बाद भी सफर खत्म नहीं होता। असली परीक्षा तो उसके बाद शुरू होती है जब चुने गए अधिकारियों को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग दी जाती है। हाल ही में सामने आई जानकारी ने कई अभ्यर्थियों को हैरान कर दिया है। पिछले पांच वर्षों में कई IAS प्रोबेशनर ट्रेनिंग के दौरान अलग-अलग परीक्षाओं में फेल हुए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर कोई ट्रेनी आईएएस अधिकारी ट्रेनिंग के दौरान परीक्षा पास नहीं कर पाता तो क्या उसकी नौकरी चली जाती है? आइए समझते हैं।
UPSC की अंतिम सूची में चयन होने के बाद IAS अधिकारियों को सीधे फील्ड में नहीं भेजा जाता। उन्हें पहले लगभग दो साल की अनिवार्य ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में होती है। इस दौरान अधिकारियों को प्रशासन, कानून, संविधान, अर्थव्यवस्था, लोक प्रशासन, व्यवहार प्रबंधन और फील्ड प्रशासन जैसे कई महत्वपूर्ण विषय पढ़ाए जाते हैं।
सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कम से कम 24 IAS प्रोबेशनर एक या उससे अधिक विषयों में पहली बार परीक्षा पास नहीं कर सके। इनमें सबसे ज्यादा मामले 2025 और 2026 में सामने आए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई बार UPSC की लंबी तैयारी के बाद उम्मीदवार मानसिक रूप से थक जाते हैं। इसी कारण ट्रेनिंग के शुरुआती महीनों में पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते। इसके अलावा, जिस राज्य का कैडर मिलता है उसकी स्थानीय भाषा की परीक्षा भी कई प्रोबेशनरों के लिए चुनौती बन जाती है।
LBSNAA में सिर्फ किताबों की पढ़ाई ही नहीं होती बल्कि अधिकारियों को प्रशासनिक जीवन के हर पहलू के लिए तैयार किया जाता है। यहां कानून, भारतीय संविधान, भारतीय अर्थव्यवस्था, लोक प्रशासन, प्रबंधन, व्यवहार विज्ञान और अन्य प्रशासनिक विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। हर विषय में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होता है। यदि कोई अधिकारी पहली बार में सफल नहीं हो पाता तो उसे दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलता है।
यही सबसे बड़ा सवाल है, जिसका जवाब जानना हर UPSC अभ्यर्थी चाहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रेनिंग के दौरान किसी परीक्षा में पहली बार फेल होने का मतलब यह नहीं है कि अधिकारी की नौकरी चली जाएगी। LBSNAA के नियमों के मुताबिक, प्रोबेशनर को सेवा जॉइन करने के चार वर्षों के भीतर सभी जरूरी परीक्षाएं पास करनी होती हैं। परीक्षा पास करने के लिए प्रयासों की कोई तय सीमा नहीं है। यदि कोई अधिकारी पहली बार सफल नहीं होता तो वह री-एग्जाम देकर परीक्षा पास कर सकता है।
कई IAS अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अकादमी ने ट्रेनिंग और मूल्यांकन दोनों को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। अब पढ़ाई के साथ अनुशासन, समय पालन, शारीरिक प्रशिक्षण और व्यवहार पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि कई अधिकारियों को शुरुआत में कठिनाई होती है लेकिन अधिकांश प्रोबेशनर री-एग्जाम में सफल हो जाते हैं।
LBSNAA के अधिकारियों के अनुसार, 2018 से 2026 के बीच ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जिसमें किसी आईएएस प्रोबेशनर को सिर्फ परीक्षा में असफल होने की वजह से सेवा से हटाया गया हो। इस अवधि में सभी प्रोबेशनरों ने तय समय के भीतर अपनी परीक्षाएं पास कर लीं। हालांकि, अकादमी में मिले अंकों का असर अधिकारियों की बैच सीनियरिटी पर जरूर पड़ता है। यानी बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को वरिष्ठता में लाभ मिल सकता है।
RTI से यह भी पता चला कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रोबेशनरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इन मामलों में कम उपस्थिति, फिजिकल ट्रेनिंग (PT) में शामिल न होना, क्लास के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करना और अकादमी के अन्य नियमों का उल्लंघन शामिल था। अकादमी का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों में जिम्मेदारी, अनुशासन और पेशेवर व्यवहार विकसित करना है।
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