मैदान पर तनाव हो या भावनाओं का उफान—ICC इसे गंभीरता से लेता है। एक गलती खिलाड़ी को भारी पड़ सकती है, क्योंकि डिमेरिट प्वाइंट्स जल्दी-जल्दी जुड़कर सीधे मैच बैन तक पहुंचा देते हैं। इसलिए आज के हाई-टेक क्रिकेट में न सिर्फ बैट-बॉल, बल्कि जुबान पर भी नियंत्रण बेहद जरूरी है।

क्रिकेट को भले ही ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता हो, लेकिन मैदान पर बढ़ता दबाव कई बार खिलाड़ियों की भाषा पर भी असर डाल देता है। एक गलत ओवर, आउट होने की चिढ़ या विपक्षी के साथ तीखी नोकझोंक—इन सबके बीच कई बार खिलाड़ियों की जुबान से निकले शब्द कैमरे और अंपायर के माइक में कैद हो जाते हैं। दर्शक भले इसे सामान्य घटना समझें, लेकिन ICC के नियम इसके लिए बेहद सख्त हैं।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने खिलाड़ियों के व्यवहार को चार अलग-अलग लेवल में बांटा है। भाषा से जुड़ी घटनाएँ आमतौर पर लेवल 1 और लेवल 2 के तहत आती हैं।
लेवल 1 अपराध
लेवल 2 अपराध
आजकल स्टम्प माइक और हाई-टेक कैमरों की वजह से खिलाड़ी की हर बात रिकॉर्ड हो जाती है। ऐसे में अगर अशोभनीय शब्द कैद हो जाए, तो मैच रेफरी के लिए कार्रवाई आसान हो जाती है। ICC बार-बार खिलाड़ियों को भाषा संयमित रखने की सलाह देता है ताकि खेल की गरिमा बनी रहे।
भाषा के कारण सजा झेलने वालों में कई नामी खिलाड़ी शामिल हैं—
इन सबको कभी न कभी मैच फीस कटने या डिमेरिट प्वाइंट मिलने का सामना करना पड़ा है।