पीएम हो सीएम जेल में रहे 30 दिन, तो जाएगी कुर्सी : पेश होगा संविधान संशोधन बिल
भारत
RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 11:05 PM
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RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 11:05 PM
राजनीति में अपराध पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार संविधान संशोधन बिल लाकर संसद में ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। आज (बुधवार) लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश होगा। इस संविधान संशोधन बिल के लागू होने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक, अगर कोई गंभीर अपराध में जेल की सलाखों के पीछे 30 दिन बिताता है, तो उनकी कुर्सी अपने आप चली जाएगी। Constitution Amendment Bill :
बिल की अहम बातें
1. प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री (अनुच्छेद 75 में संशोधन)
* कोई केंद्रीय मंत्री यदि लगातार 30 दिन तक जेल में है तो राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर उसका पद समाप्त कर देंगे।
* यदि प्रधानमंत्री सलाह नहीं देते, तो 31वें दिन मंत्री अपने आप पद से बाहर माने जाएंगे।
* अगर खुद प्रधानमंत्री 30 दिन जेल में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उनका पद स्वत: समाप्त हो जाएगा।
* हालांकि रिहाई के बाद राष्ट्रपति चाहे तो फिर से उन्हें मंत्री या प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं।
2. मुख्यमंत्री और राज्य मंत्री (अनुच्छेद 164 में संशोधन)
* कोई राज्य मंत्री यदि 30 दिन तक जेल में रहता है, तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा देंगे।
* अगर मुख्यमंत्री सलाह नहीं देते, तो 31वें दिन मंत्री का पद स्वत: समाप्त हो जाएगा।
* मुख्यमंत्री खुद यदि 30 दिन जेल में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन इस्तीफा देना होगा, नहीं तो उनकी कुर्सी अपने आप खत्म हो जाएगी।
* रिहाई के बाद राज्यपाल चाहे तो उन्हें फिर से मुख्यमंत्री या मंत्री बनाया जा सकता है।
क्यों खास है यह बिल?
* पहली बार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी सीधे कानून की परिधि में लाया जा रहा है।
* राजनीति में अपराधीकरण पर लगाम लगाने का सरकार का यह अब तक का सबसे कड़ा कदम माना जा रहा है।
* गंभीर अपराध (जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है) के आरोपी नेताओं के लिए यह संशोधन लागू होगा।
संसद में हंगामे के आसार
बिल को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पेश करेंगे। विपक्ष से तीखी बहस की संभावना है, हालांकि सरकार इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का आग्रह करेगी। यह संशोधन लागू हुआ तो राजनीति की तस्वीर बदल सकती है। अब जेल की सलाखों के पीछे बैठे नेताओं के लिए सत्ता का दरवाजा अपने आप बंद हो जाएगा।