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भीषण गर्मी, लू और कम बारिश की आशंकाओं के बीच देशवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इंडियन मेट्रोलाजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) और कई मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सक्रिय हो रहा अल नीनो 2026 के आखिर तक अपने चरम पर पहुंच सकता है, लेकिन 2027 के मानसून से पहले इसके कमजोर पड़ने की संभावना है।

Weather Forecast : भीषण गर्मी, लू और कम बारिश की आशंकाओं के बीच देशवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इंडियन मेट्रोलाजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) और कई मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सक्रिय हो रहा अल नीनो 2026 के आखिर तक अपने चरम पर पहुंच सकता है, लेकिन 2027 के मानसून से पहले इसके कमजोर पड़ने की संभावना है। ऐसे में अगले साल भारत में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है। Weather Forecast
देश के कई राज्यों में इस समय तेज गर्मी और लू का प्रकोप देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियां वैश्विक मौसम को प्रभावित कर रही हैं। इसके कारण भारत में मानसून कमजोर पड़ने और बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की स्थिति बनने पर समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है। भारत में इसका सीधा असर मानसून, खेती और जल संसाधनों पर पड़ता है। Weather Forecast
मौसम विशेषज्ञों ने 1997-98 और 2015-16 जैसे पुराने शक्तिशाली अल नीनो वर्षों का अध्ययन किया है। इन अध्ययनों में पाया गया कि मजबूत अल नीनो आमतौर पर सर्दियों तक चरम पर पहुंचता है और अगले मानसून से पहले कमजोर होने लगता है। इसी आधार पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2027 तक अल नीनो न्यूट्रल स्थिति या फिर ला नीना में बदल सकता है। ला नीना की स्थिति भारत के लिए आमतौर पर फायदेमंद मानी जाती है क्योंकि इससे मानसून मजबूत होता है और अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
अल नीनो एक मौसमी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। भारत में अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून, सूखा, कम बारिश और अधिक गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। Weather Forecast
ला नीना अल नीनो का उल्टा चरण माना जाता है। इसमें समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा ठंडा हो जाता है। इससे भारत में मानसून मजबूत होने और अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाती है। कई बार ला नीना के दौरान सामान्य से ज्यादा वर्षा भी रिकॉर्ड की गई है। भारत की बड़ी आबादी और कृषि व्यवस्था मानसून पर निर्भर है। अगर बारिश कम होती है तो खेती, जलाशयों और बिजली उत्पादन पर असर पड़ता है। वहीं अच्छी बारिश होने पर फसलों का उत्पादन बेहतर होता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 2027 में ला नीना सक्रिय होता है तो इससे किसानों को राहत मिल सकती है और खाद्य उत्पादन बेहतर रह सकता है। Weather Forecast
अमेरिकी मौसम एजेंसी एनओएए के अनुसार 2026 में अल नीनो बनने की संभावना काफी मजबूत है और इसके सर्दियों तक बने रहने के संकेत हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर अगले मानसून तक कमजोर पड़ सकता है। वहीं आईएमडी का कहना है कि मौसम पूवार्नुमान लंबी अवधि में पूरी तरह निश्चित नहीं होते, लेकिन मौजूदा संकेत 2027 के लिए राहत देने वाले दिखाई दे रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भारतीय मानसून केवल अल नीनो पर निर्भर नहीं करता। इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी), हिमालयी बर्फबारी, समुद्री हवाएं और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कई अन्य कारक भी मानसून को प्रभावित करते हैं। कई बार मजबूत अल नीनो के बावजूद भारत में सामान्य बारिश दर्ज की गई है। अभी देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी और संभावित कमजोर मानसून है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई हिस्सों में गर्म हवाओं और तापमान बढ़ने की चेतावनी दी है। हालांकि बीच-बीच में आंधी और बारिश से कुछ राहत मिलने की उम्मीद भी जताई गई है। ऐसे में 2027 के लिए बेहतर मानसून की उम्मीद फिलहाल लोगों, किसानों और नीति निमार्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। Weather Forecast
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