फॉस्फोरस की कमी से पौधों में होने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए एनबीआरआई ने पहल की और संस्थान ने जीवाणु और कवक संघ माइक्रोब्स तैयार किए हैं। यह माइक्रोब्स मिट्टी में मौजूद फॉस्फोरस को घुलनशील बनाकर पौधों की जड़ों को बढ़ने में मदद करेंगे। जिन्हें हम पीएसबी से भी जानते है।

आज कृषि जगत में टिकाऊ खेती की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती गुणवत्ता ने किसानों को प्रकृति आधारित समाधानों की ओर मुड़ रहा है। इसी क्रम में पीएसबी (फॉस्फोरस घुलनशील जीवाणु) एक भरोसेमंद, कारगर और टिकाऊ विकल्प के रूप में तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
फॉस्फोरस पौधों के लिए सबसे आवश्यक मैक्रोन्यूट्रिएंट्स में से एक है। बावजूद इसके, मिट्टी में मौजूद कुल फॉस्फोरस का केवल एक छोटा हिस्सा ही पौधों को उपलब्ध हो पाता है। अधिकांश फॉस्फोरस कैल्शियम, एल्युमिनियम या आयरन के साथ जुड़कर अघुलनशील रूप ले लेता है, जिसे पौधे अवशोषित नहीं कर पाते।
यह सूक्ष्मजीव कार्बनिक अम्ल (जैसे फॉर्मिक, लैक्टिक, एसिटिक आदि) और एंज़ाइम (फॉस्फेटेस, फाइटेज) छोड़कर बंद पड़े फॉस्फोरस को घुलनशील बनाते हैं और पौधों को आसानी से उपलब्ध कराते हैं।
हालाँकि बाज़ार में लंबे समय से कई पीएसबी उपलब्ध हैं, लेकिन आज भी किसानों को इनकी प्रभावकारिता और स्थिरता को लेकर शिकायतें रहती हैं।
किसानों के मन में भरोसा तभी बनेगा जब उत्पाद लगातार, स्थिर और हर प्रकार की मिट्टी में प्रभावी परिणाम दें।
बायोप्राइम ने वर्षों के शोध के बाद ऐसा पीएसबी उत्पाद विकसित किया है जो पारंपरिक जैवउर्वरकों की सीमाओं को पीछे छोड़ देता है।
जहाँ सामान्य PSB केवल कैल्शियम-बाउंड फॉस्फेट को घुला पाते हैं, वहीं फॉस्फोनेक्सस कैल्शियम, एल्युमिनियम और आयरन—तीनों के साथ बंद फॉस्फेट को घुलनशील कर सकता है। यह क्षमता भारतीय कृषि भूमि के लगभग 65% हिस्से में इसे प्रभावी बनाती है।
बायोप्राइम के शक्तिशाली माइक्रोब्स अत्यधिक प्रतिरोधी हैं और कठिन परिस्थितियों में भी फॉस्फोरस घोलने की क्षमता बनाए रखते हैं।
जहाँ सामान्य पीएसबी 4–8 pH के बाहर प्रभाव खो देते हैं, वहीं फॉस्फोनेक्सस अम्लीय से क्षारीय—लगभग हर प्रकार की मिट्टी में समान रूप से काम करता है।
भारत जैसी गर्म जलवायु में यह एक बड़ा प्लस पॉइंट है। अन्य उत्पादों में 30–33°C पर सीएफयू गिरने लगता है, जिससे प्रभाव कम हो जाता है।
बेहतर फॉस्फोरस उपलब्धता
कुल मिलाकर, फसल की स्वाभाविक उपज बढ़ती है।
बायोप्राइम का फॉस्फोनेक्सस असंगत फील्ड परिणाम, कम सीएफयू व ताप-संवेदनशीलता जैसी चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है। यह भारतीय मिट्टी की विविधता को ध्यान में रखकर बनाया गया अगली पीढ़ी का पीएसबी जैवउर्वरक है।
मिट्टी में बंद पड़े फॉस्फोरस को अनलॉक करें, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाएँ और अपनी फसल को दें प्राकृतिक पोषण।