अपोलो की 'हेल्थ ऑफ द नेशन रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत के युवाओं में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां समय से पहले उभर रही हैं और लंबे समय तक अनजानी बनी रहती हैं।

National News : भारत में जीवनशैली से जुड़ी गंभीर बीमारियां अब पहले की तुलना में बहुत कम उम्र में सामने आ रही हैं। अपोलो की 'हेल्थ ऑफ द नेशन रिपोर्ट 2026' के मुताबिक, ये बीमारियां न केवल जल्दी उभर रही हैं, बल्कि लंबे समय तक अनजानी बनी रहती हैं और अक्सर नियमित जांच में भी पकड़ में नहीं आतीं। यह रिपोर्ट बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है, जो 30 लाख से अधिक प्रिवेंटिव हेल्थ असेसमेंट (निवारक स्वास्थ्य मूल्यांकन) पर आधारित है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत एक शांत स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है, जिससे देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 30 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर रुझान देखे गए हैं। इस आयु वर्ग के लगभग पांच में से एक व्यक्ति पहले से ही प्री-डायबिटिक हैं, जबकि आधे से अधिक लोग ओवरवेट (अधिक वजन वाले) पाए गए हैं। इसके अलावा, करीब 70 प्रतिशत युवाओं में विटामिन डी की कमी पाई गई है। National News :
कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने वाली आबादी के आंकड़े और भी चिंताजनक हैं। इस समूह के 81 प्रतिशत लोग ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त हैं। वहीं, 55 प्रतिशत लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य है और 45 प्रतिशत लोग या तो प्री-डायबिटिक हैं या उन्हें डायबिटीज है।
रिपोर्ट में हृदय स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी डेटा दिया गया है। बिना किसी लक्षण वाले व्यक्तियों में कोरोनरी कैल्शियम स्कोरिंग की जांच में 45 प्रतिशत मामलों में शुरुआती प्लाक फॉर्मेशन (प्लाक का जमना) देखा गया। मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन में पाया गया कि 15 में से एक व्यक्ति अवसाद (डिप्रेशन) से और 10 में से एक व्यक्ति चिंता (एंजायटी) से ग्रस्त है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन में से दो युवा वयस्क पहले से ही गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के जोखिम पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 30 साल से कम उम्र के 28 प्रतिशत प्री-डायबिटिक लोग समय रहते कदम उठाएं, तो इस स्थिति को बदला जा सकता है, जबकि 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह संभावना केवल 7 प्रतिशत है। National News :
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खराब शारीरिक कार्यक्षमता, विटामिन की कमी और गतिहीन जीवनशैली को इन बीमारियों के मुख्य कारणों के रूप में बताया गया है। रिपोर्ट में नींद, पोषण, नियमित जांच और जीवनशैली में बदलाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निवारक देखभाल को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की सिफारिश की है। इस संकट से निपटने के लिए सरकारी और कॉर्पोरेट वेलनेस कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, ताकि व्यक्तिगत और सक्रिय स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में बढ़ा जा सके। National News :
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