
ATAGS को देश में ही डिजाइन और डेवलप किया गया है, और अब इसका उत्पादन दो प्रमुख प्राइवेट कंपनियों — भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स द्वारा किया जाएगा। इस डील में दोनों कंपनियों को हिस्सेदारी दी गई है, जिसमें भारत फोर्ज को 60 फीसदी तोपों की डिलीवरी करनी है, जबकि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को 40 फीसदी निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। यह डील इस बात का प्रतीक है कि भारत अब अपनी रक्षा आवश्यकता को स्वदेशी स्तर पर पूरा करने के लिए तैयार है।
इसकी खासियत है अत्यधिक मारक क्षमता है। यह तोप दुनिया में सबसे ज्यादा रेंज वाली 155 mm 52 कैलिबर की तोप मानी जाती है, जो 48 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह 15 सेकंड में 3 राउंड, 3 मिनट में 15 राउंड और लगातार एक घंटे में 60 राउंड गोले दागने की क्षमता रखती है। इसकी डिजाइन इस प्रकार की गई है कि यह सभी मौसमों में प्रभावी रूप से काम कर सके। ATAGS का परिक्षण पोखरण के रेगिस्तान से लेकर सिक्किम की पहाड़ियों तक सफलतापूर्वक हो चुका है, और अब इसे भारतीय सेना(Indian Army) के बेड़े में शामिल किया गया है।
भारतीय सेना(Indian Army) ने 1999 में कारगिल युद्ध के बाद अपने तोपखाने के आधुनिकीकरण की दिशा में काम करना शुरू किया था। वर्तमान में भारतीय सेना(Indian Army) का लक्ष्य 2027 तक 2800 तोपों को शामिल करना है, जिसमें 155 mm की विभिन्न कैलिबर की तोपें शामिल होंगी। अब तक, कई योजनाओं को पूरा किया जा चुका है, जिनमें 145 अल्ट्रा लाइट होवित्जर का शामिल होना और 100 ट्रैक्टेड सेल्फ प्रोपेल्ड K-9 वज्र तोपों की खरीद शामिल है। इसके अलावा, भारतीय सेना ने 180 विल्ड सेल्फ प्रोपेल्ड गनों को भी अपने आधुनिकीकरण योजना में शामिल करने का लक्ष्य रखा है।
सेना(Indian Army) का लक्ष्य 2040 तक अपने तोपखाने के सभी तोपों को 155 कैलिबर में तब्दील करना है। यह कदम भारतीय सेना की ताकत को और मजबूत करेगा और इसे आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में भी अत्यधिक प्रभावी बनाएगा। ATAGS की खरीद से सेना के तोपखाने की ताकत में एक नई जान आएगी और यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।Indian Army: