Indian railway- आज फुल स्पीड से टकराएंगी 2 ट्रेन, रेल मंत्री भी रहेंगे सवार
ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली का आज होगा परीक्षण
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 12:58 AM
Indian railway- भारत निर्मित ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली 'कवच' का आज परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण सिकंदराबाद में किया जाएगा। इस परीक्षण के दौरान विपरीत दिशा से दो ट्रेनें तेज गति से एक दूसरे की तरफ बढ़ेगी। परंतु 'कवच' की मदद से दोनों ट्रेनें आपस में टकराएंगी नहीं।
ट्रेनों में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन होंगे सवार-
आज होने वाले 'कवच' के परीक्षण के दौरान जब दो ट्रेनें विपरीत दिशा से तेज गति से एक दूसरे की तरफ बढ़ेगी, उस समय एक ट्रेन में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnav) सवार होंगे वहीं दूसरी ट्रेन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके त्रिपाठी (Railway Board Chairman VK Tripathi) सवार होंगे।
इस परीक्षण के दौरान रेल मंत्री और अन्य बड़े अधिकारियों की उपस्थिति में- 'टक्कर सुरक्षा प्रणाली किन किन स्थितियों में किस तरह से दुर्घटना रोकने में सफल होती है?' का प्रदर्शन किया जाएगा।
शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बनाई गई स्वचालित ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली-
देश में बनाई गई कवच, दुनिया की सबसे सस्ती स्वचालित ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली है। इस सुरक्षा प्रणाली के निर्माण के पीछे का उद्देश्य है शून्य दुर्घटना के लक्ष्य को प्राप्त करना। इस स्वचालित सुरक्षा प्रणाली को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह निर्धारित दूरी के भीतर उसी लाइन पर दूसरी ट्रेन के आने की जानकारी मिलते ही स्वचालित रूप से ट्रेन को तुरंत रोक देगा।
इस स्वचालित सुरक्षा प्रणाली की मदद से आमने-सामने की टक्कर, पीछे से होने वाले टक्कर को रोकने के अलावा खतरे का संकेत मिलते ही ट्रेन को बिना किसी नुकसान रोकने में मदद मिलेगी। इसे 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति के लिए अनुमोदित किया गया है।
इस प्रणाली को लेकर क्या है रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना -
ट्रेन टक्कर सुरक्षा प्रणाली 'कवच' को लेकर रेलवे (Indian railway) के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस डिजिटल प्रणाली की मदद से मानवीय त्रुटि हो जैसे लाल सिग्नल को नजरअंदाज कर देना या अचानक से आ गई किसी खराबी की वजह से होने वाली दुर्घटना से बचा जा सकेगा। ऐसी परिस्थितियां सामने आने पर ट्रेन खुद ही रुक जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों ने यह भी बताया कि इंटरनेशनल लेवल पर इस तरह की प्रणाली पहले भी आ चुकी है परंतु वहां प्रति किलोमीटर संचालन में लगभग दो करोड़ का खर्च लगता है, जबकि 'कवच' के संचालन में प्रति किलोमीटर लगभग 50 लाख का खर्च आएगा, जो तुलनात्मक रूप से काफी कम है।
साल 2022 के केंद्रीय बजट का लक्ष्य है 2000 किलोमीटर-
आत्मनिर्भर भारत के तहत साल 2022 का जो केंद्रीय बजट पेश किया गया है, उसका लक्ष्य 2,000 किलोमीटर तक के रेल नेटवर्क को ‘कवच' के तहत लाना है। दक्षिण मध्य रेलवे में अब तक 1098 किलोमीटर मार्ग में कवच को ला दिया गया है। इसके बाद अब दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर इसे लाने की योजना है।
कवच के सफलतापूर्वक परीक्षण हो जाने के बाद रेलवे दुर्घटनाओं को टालने में मदद मिलेगी। जो जन और धन दोनों के लिए लाभदायक साबित होगी।