टर्बुलेंस में टूटा Indigo फ्लाइट का फ्रंट, इमरजेंसी लैंडिंग से बचीं 220 जानें!
भारत
चेतना मंच
26 Nov 2025 07:48 PM
श्रीनगर: दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6E2142 बुधवार को उस समय गंभीर संकट में आ गई जब उसे रास्ते में तेज़ ओलावृष्टि और भीषण टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। इस दौरान विमान का फ्रंट (नोज) हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। पायलट ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी लैंडिंग का निर्णय लिया और विमान को श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। विमान में सवार सभी 227 यात्रियों और क्रू के सदस्य सुरक्षित हैं।
अचानक बिगड़ा मौसम, विमान टकराया ओलों से
यह घटना उस समय हुई जब फ्लाइट ने दिल्ली से नियमित उड़ान भरकर श्रीनगर की ओर प्रस्थान किया था। उड़ान के बीच मौसम अचानक बिगड़ गया और विमान को भारी ओलावृष्टि व टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। इससे विमान बुरी तरह हिलने लगा और यात्री दहशत में आ गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए डर के लम्हे
यात्रियों द्वारा पोस्ट किए गए सोशल मीडिया वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि विमान के अंदर अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ लोग प्रार्थना कर रहे थे, तो कुछ घबराकर सीट पकड़ कर बैठे थे। एक यात्री ओवैस मकबूल हकीम ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “मैं विमान में था... यह एक मौत जैसा अनुभव था। विमान का अगला हिस्सा टूट चुका था।”
इमरजेंसी कॉल और पायलट की सतर्कता ने बचाई जानें
विमान में टर्बुलेंस बढ़ने के बाद पायलट ने तुरंत श्रीनगर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को आपात स्थिति की सूचना दी। विमान को "Aircraft on Ground (AOG)" घोषित किया गया – यानी तकनीकी कारणों से उसे फिलहाल ग्राउंड किया गया है और वह अगली उड़ान के लिए सक्षम नहीं है।
Indigo का आधिकारिक बयान
एयरलाइन इंडिगो ने बयान जारी करते हुए कहा “उड़ान 6E2142 ने श्रीनगर पहुंचने से पहले रास्ते में अप्रत्याशित ओलावृष्टि का सामना किया। फ्लाइट और चालक दल ने सभी प्रोटोकॉल का पालन किया और विमान को सुरक्षित रूप से उतारा गया। श्रीनगर पहुंचने के बाद एयरपोर्ट स्टाफ ने यात्रियों को हर आवश्यक सहायता दी। विमान का निरीक्षण और जरूरी रखरखाव किया जाएगा।”
220 लोगों की जान बची, लेकिन सवाल बरकरार
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बदलते मौसम के बीच हवाई सफर कितना असुरक्षित हो सकता है। हालांकि पायलट की सूझबूझ और फ्लाइट क्रू की तत्परता से बड़ी त्रासदी टल गई, लेकिन विमान के नाक और दाहिने हिस्से के टूटने जैसी घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
क्या अगली बार उड़ान से पहले मिलेगा मौसम अलर्ट?
अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए इंडियन एविएशन सेक्टर को और सतर्क होने की जरूरत है? क्या यात्रियों को पहले से मौसम की गंभीर जानकारी नहीं दी जानी चाहिए?
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