Inspiration सहारनपुर। राजनीति में परिवार के सदस्यों को आगे बढ़ाने के लिए आज के नेता क्या कुछ नहीं करते हैं। यहां कि अपनी ही राजनीतिक दलों के प्रमुखों से अपने परिवार के सदस्यों को टिकट देने की सिफारिश करते हैं। लेकिन सहारनपुर में सपा के एक ऐसे बड़े नेता भी रहे हैं, जिन्होंने अपने बेटे को सदन में भेजने की बाबत सिफारिश तक नहीं की बल्कि अपने ही बेटे को नसीहत दी थी कि यदि सदन में जाना है तो मेहनत करें। जी हां, हम बात कर रहे हैं सपा के आजीवन प्रदेश अध्यक्ष रहे चौधरी रामशरण दास की है। आज चौधरी रामशरण दास इस दुनिया में नहीं है, लेकिन चुनाव का माहौल चल रहा है तो उन्हें कैसे भुला जा सकता है। उत्तर प्रदेश के सियासी इतिहास में चौधरी रामशरण दास गुर्जर का नाम आज भी हर किसी की जुबान पर रहता है। रामशरण दास के सियासी योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। रामशरण दास उन दिनों संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी में थे।
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रामशरणदास ने 1971 में रायबरेली के चुनाव में राज नारायण के लिए प्रचार किया था। हालांकि इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जीत हुई थी और राज नारायण हार गए थे। 1971 के चुनाव को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें रामशरण दास की गवाही हुई थी। रामशरण दास को उन दिनों कई तरह के प्रलोभन भी दिए गए थे, लेकिन वो डिगे नहीं और अदालत में गवाही दी थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने 1971 के चुनाव को खारिज कर दिया था। तख्तापलट की आशंका के चलते देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी। इमरजेंसी में रामशरण दास जेल भी गए थे। रामशरण दास दो बार विधानसभा सदस्य भी रहे। इसके अलावा वे चार बार विधान परिषद के सदस्य व योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ के अध्यक्ष भी रहे थे।
अपने बेटे से कहा था मेहनत करें रामशरण दास की ईमानदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है उन्होंनें अपने पुत्र जगपाल के लिए कभी सिफारिश नहीं की। बताया जाता है कि 2006 में विधानसभा परिषद सदस्यों का चुनाव होना था। किसी ने कहा कि बलराम यादव ने सुझाव दिया है कि उनके पुत्र जगपाल दास को विधान परिषद भेज दिया जाए। इस बात पर चौधरी रामशरण दास उखड़ गए और बोले कि जगपाल को सदन में जाना है तो काम करे व चुनाव लड़े। रामशरण दास का लड़का होने के कारण विधानसभा परिषद नहीं जाएंगे।