International Mother Language Day 2023- मातृभाषा सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि भावना है !
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
भारत
चेतना मंच
21 Feb 2023 12:12 PM
International Mother Language Day 2023- भाषा का किसी भी जीव के जीवन में बहुत महत्व होता है। मनुष्य से लेकर जानवर तक अपनी बातों को समझाने के लिए किसी ना किसी भाषा का उपयोग करते हैं। खासतौर से जब हम बात मनुष्य की करते हैं तो मनुष्य के लिए उसकी मातृभाषा यानी जिस भाषा में सामान्य तौर पर वह बातचीत करता है, का अपना एक अलग ही महत्व होता है। राष्ट्रभाषा, अंतर्राष्ट्रीय भाषा के माध्यम से जहां व्यक्ति अपने विचारों को दूसरों के सामने रखता है, वही मातृभाषा के मदद से व्यक्ति ना सिर्फ अपने विचारों बल्कि अपने भावनाओं को भी व्यक्त कर पाता है।
मनुष्य के जीवन में उसकी मातृभाषा का बेहद महत्व होता है। यह वो भाषा होती है जो बच्चा बचपन से सुनता आता है, और जब पहली बार बोलना सीखता है तो इसी भाषा का इस्तेमाल करता है। इस भाषा को सीखने के लिए उसे अलग से शिक्षा लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।मातृभाषा की महत्वता को बताने, भाषाई सांस्कृतिक विविधता एवं बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष 21 फरवरी का दिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) के रुप में मनाया जाता है। इस खास मौके पर दुनिया भर के लोग सोशल मीडिया वर्कशॉप एवं विभिन्न आयोजनों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को सेलिब्रेट करते हैं।
आइए जानते हैं क्या है अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का इतिहास एवं महत्व -
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का इतिहास -
17 नवंबर साल 1999 को यूनेस्को ने निर्णय लिया था कि प्रतिवर्ष 21 फरवरी को संपूर्ण विश्व में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाएगा। इसके पीछे का इतिहास यह है कि साल 1952 में ढाका विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बांग्ला मातृभाषा के अस्तित्व के लिए धरना प्रदर्शन शुरू किया था। यह धरना प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होता चला गया। प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए तत्कालीन पाकिस्तान सरकार की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाई, जिसकी वजह से कई लोगों की जानें गई। बाद में जब बांग्लादेश सरकार अस्तित्व में आई तब यूनेस्को के सामने मातृभाषा दिवस का प्रस्ताव रखा। यूनेस्को ने इस प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए 1952 में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की याद में 21 फरवरी को संपूर्ण विश्व में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।
भारत में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का है खास महत्व -
भारत एक ऐसा देश है जो विविधताओं से भरा हुआ है। रंग, रूप, वेश, भाषा, धर्म हर क्षेत्र में देश में विविधता देखने को मिलती है। बात की जाए भाषा की तो भारत एक बहुभाषी देश है। यहां की राष्ट्रभाषा भले ही हिंदी है, लेकिन हर राज्य की अलग अलग मातृभाषा है। इसके साथ ही हर राज्य में आने वाले जिलों, गांवों और कस्बों की भाषा में भी अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में भारत देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की महत्वता और भी अधिक बढ़ जाती है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में द्विभाषिता और बहुभाषा का प्रचलन अधिक देखने को मिलता है। क्योंकि देश की राष्ट्रभाषा हिंदी है, ऐसे में गैर हिंदी भाषी राज्यों कि अक्सर शिकायत होती है कि उन पर हिंदी थोपी जाती है। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के माध्यम से सभी भाषाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का एक उद्देश्य है।
International Mother Language Day 2023 थीम-
प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस साल 2023 के लिए जो थीम निर्धारित की गई है वह है- "बहुभाषी शिक्षा: शिक्षा को बदलने की आवश्यकता"।
दुनिया भर में करीब 6900 भाषाएं बोली जाती हैं। इनमें से 90% भाषाएं बोलने वाले लोग एक लाख से भी कम है। 69 भाषाओं में से करीब 46 फ़ीसदी भाषाएं लगभग लुप्त है। पूरी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में -अंग्रेजी, जापानी, स्पेनिश, हिंदी, बांग्ला, रूसी, पंजाबी, पुर्तगाली, अरबी इत्यादि है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक विश्व की कुल भाषाओं में से केवल कुछ प्रतिशत भाषाओं को ही शिक्षा प्रणालियों और सार्वजनिक क्षेत्रों में जगह मिल पाई है। पूरी वैश्विक आबादी के करीब 40% लोगों ने ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त नहीं की है जो वो मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। डिजिटल दुनिया में तो वैश्विक स्तर पर 100 से भी कम भाषाओं का उपयोग किया जाता है।
आज इस वैश्वीकरण के दौर में रोजगार के अवसरों के लिए विदेशी भाषाओं को सीखने की होड़ में कहीं ना कहीं, कई मातृभाषाएं लुप्त होने के कगार पर है। दुनिया भर में हजारों की संख्या में ऐसी मातृभाषाएं हैं जिनका अस्तित्व आज खतरे में है। अपनी भाषाओं को बोलने में संकोच करने के कारण आज बहुत सी मातृभाषा अंतिम सांस ले रही है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मातृभाषा हमें पीछे नहीं बल्कि हमारी संस्कृति को सबसे आगे लाकर खड़ा कर देती है। आज यह समझने की आवश्यकता है कि मातृभाषा से बड़ी कोई भाषा नहीं होती है, इसलिए इसे बोलने में संकोच नहीं अपितु गर्व महसूस करना चाहिए।