अजीबो-गरीब :शख्स के गले में था असहनीय दर्द, फूड पाइप में फंसे जीव को देख चकराया डॉक्टर का सिर
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:45 AM
By: Supriya Srivastava, 7 July, Singapore
International News: अंतर्राष्ट्रीय खबरों में एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। मामला है सिंगापुर (Singapore) का जहां पर गले के दर्द से परेशान एक 55 वर्षीय व्यक्ति का जब डॉक्टरों ने सिटी स्कैन करवाया तो, फूड पाइप में देखने को मिली अजीबो गरीब चीज। जानें क्या है पूरा मामला -
दरअसल पूरा मामला है सिंगापुर का। यहां के एक 55 वर्षीय शख्स को गले में दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। यह समस्या उस व्यक्ति को सेफलोपॉड फूड (एक प्रकार का समुद्री जीवों से बना फूड, जिसे आम भाषा में सी फूड कहते हैं) खाने के बाद हुई। व्यक्ति को खाना निगलने में भी तकलीफ हो रही थी इसके साथ ही गले में तेज दर्द और उल्टी की समस्या पैदा हो गई।
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इलाज के लिए शख्स सिंगापुर के टैन टॉक सेंग अस्पताल (Tan Tock Seng Hospital Singapore) पहुंचा। जहां पर डॉक्टरों ने उस शख्स का सिटी स्कैन किया। सिटी स्कैन में फूड पाइप में कुछ ऐसी चीज दिखाई दी जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर के रख दिया।
फूड पाइप में फंसा था ये जीव -
Singapore के Tan Tock Seng Hospital के डॉक्टरों ने सिटी स्कैन में पाया कि शख्स के फूड पाइप में ऑक्टोपस फंसा हुआ था। 8 पैरों वाला ये जीव व्यक्ति के एसोफैगस - पेट की सीमा से 2 इंच की दूरी पर फंसा हुआ था। सिटी स्कैन के बाद व्यक्ति की एसोफैगोगैस्ट्रोडोडेनोस्कोपी (Esophagogastroduodenoscopy, EGD) भी की गई जिसमें डॉक्टरों ने फूड पाइप में फंसे हुए ऑक्टोपस की सही स्थिति पता की।
कड़ी मशक्कत के बाद हो पाया शख्स का इलाज -
अंतरराष्ट्रीय ताजा खबरों के मुताबिक गले के दर्द से परेशान व्यक्ति के फूड पाइप से ऑक्टोपस को बाहर निकालने के प्रारंभिक प्रयास पूर्णतः असफल रहे। बाद में डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत के बाद एंडोस्कोप को ऑक्टोपस के पीछे से पेट में डालकर रिट्रोफ्लेक्स करते हुए खींचकर जीव को बाहर निकाला। ऑक्टोपस बाहर निकाले की प्रक्रिया को पूरी करने के बाद 2 दिन तक शक्स को अस्पताल में ही रखा गया। फिर उसे छुट्टी दे गई।
Tan Tock Seng Hospital के शोधकर्ताओं के अनुसार उनके पास ऐसे ही गले में अजीब चीजों के अटकने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। चूंकि कई देशों में सीफूड खाने का प्रचलन अधिक है ऐसे में इस तरह की समस्याएं होना आम बात है। शोधकर्ताओं के अनुसार इस तरह के मामलों में 10% से 20% मामलों में उन्हें एंडोस्कोपिक तकनीक की आवश्यकता पड़ती है, जबकि सिर्फ 1% मामले में सर्जरी की आवश्यकता होती है।