International Universal Health Coverage Day : विश्व को स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूक करना।
International Universal Health Coverage Day: To make the world aware of health facilities.
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:38 PM
International Universal Health Coverage Day : 12 दिसंबर के दिन प्रत्येक वर्ष विश्व भर में स्वास्थ्य से जुड़ी हुई जानकारी एवं सुख- सुविधाओं को फैलाने के लिए अंतराष्ट्रीय सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस मनाया जाता है। समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से स्वास्थ्य से जुड़े हुए मूलभूत लाभ मिल सकें इसके कारण आज के दिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधित मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाता है। आइये जानते हैं इस दिन का महत्व और वर्ष 2022 की अंतराष्ट्रीय सार्वभौमिक स्वास्थ्य दिवस की थीम...
International Universal Health Coverage Day :
कैसेशुरूहुआयूनिवर्सलस्वास्थ्यकवरेजदिवस?
12 दिसंबर वर्ष 2012 में 80 भी अधिक देशों के लगभग 400 संगठनों ने यह संकल्प लिया कि वे समाज के किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य सुविधाओं से अछूता नहीं रहने देंगे। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, रॉकफेलर फाउंडेशन और ऑक्सफैम इंडिया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
UHC ने जन-जन के बीच स्वास्थ्य लाभ को पहुंचाने का कार्य शुरू किया किन्तु आज भी समाज के तबके के कई लोग इस मूलभूत सुविधा से अछूते रहते हैं। यही नहीं कुछ बीमारियां ऐसी भी हैं जिन्हें बीमारी के तौर पर देखा ही नहीं जाता है। खराब मानसिक स्थिति इसका एक सटीक उदाहरण है। ऐसे विषयों पर भी जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन को मनाया जाता है।
क्यारहेगीवर्ष2022 केअंतराष्ट्रीयसार्वभौमिकस्वास्थ्यकवरेजदिवसकीथीम?
स्वास्थ्य के महत्व को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम Universal Health Coverage 2022 Theme: "Build the world we want: A healthy future for all" निर्धारित की गयी है। यह थीम UHC की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती है। यह भी ज्ञात है कि वर्ष 2023 में UHC की एक बड़ी बैठक होनी है।
क्याहैभारतकीस्वास्थ्यवर्गमेंस्थिति?
आंकड़ों की तरफ देखा जाए तो भारत के हेल्थ सेक्टर में और भी ज्यादा रिफार्म की आवश्यकता है। देश के 1445 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है जबकि Who के नियमों के अनुसार यह 1000 होना चाहिये। देश में नर्स और रोगी का अनुपात भी 1:483 है जो यह दिखाता है कि देश में लगभग 20 लाख नर्सेस की कमी है। हालांकि देश में आयुष्मान भारत जैसी बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू की गयी हैं किन्तु वास्तविकता मायनों में गरीब की स्वास्थ्य सेवापूर्ती के लिए काफ़ी कार्य करने की आवश्यकता है।