शेयर बाजार में तबाही की आहट या है ये सिर्फ एक भ्रम! प्रमोटर्स की रिकॉर्ड बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
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भारत
चेतना मंच
10 Jul 2025 12:22 PM
Share Market : क्या भारतीय शेयर बाजार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं या फिर यह सिर्फ एक भ्रम है? जून महीने में प्रमोटर्स और इंसाइडर्स की ओर से हुई रिकॉर्ड बिकवाली ने रिटेल निवेशकों के मन में सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। ये आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं कि महज जून में ही 11 अरब डॉलर की हिस्सेदारी बेची गई जिससे साल 2025 की पहली छमाही में कुल बिकवाली का आंकड़ा 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया है लेकिन कहानी का दूसरा पहलू और भी दिलचस्प है उसी दौरान रिटेल निवेशकों ने 40 अरब डॉलर की खरीदारी की, जिसके चलते बाजार ने 2025 की पहली छमाही में करीब 7 फीसदी की रैली दिखाई है।
खतरे की घंटी या रणनीतिक फैसला?
बीते महीनों में मुकेश अंबानी (रिलायंस), सुनील मित्तल (एयरटेल), बजाज फाइनेंस, इंडिगो, वी-मार्ट जैसी कई बड़ी कंपनियों में प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी में कटौती की है। आम तौर पर बाजार में इसे "नकारात्मक संकेत" माना जाता है, क्योंकि प्रमोटर्स को कंपनी के भविष्य की सबसे ज्यादा जानकारी होती है। लेकिन विशेषज्ञों की राय थोड़ी अलग है। वेंचुरा के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, यह बिकवाली संकट का संकेत नहीं बल्कि स्ट्रैटेजिक एग्जिट है कर्ज चुकाना, निवेश में विविधता लाना या निजी परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना इसका मुख्य मकसद है।
किया गया करीब 28,000 करोड़ रुपये की निवेश
इसी दौरान विदेशी निवेशकों (FPI) ने भी 11 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके बावजूद बाजार में गिरावट नहीं आई। कारण रिटेल निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फंड्स की आक्रामक खरीदारी, जिसने बाजार की गिरावट को थाम लिया। जून 2025 में म्यूचुअल फंड्स ने करीब 28,000 करोड़ रुपये की निवेश किया, जो प्रमोटर्स की बिकवाली से उपजे दबाव को संतुलित करने में कामयाब रहा। इसके अलावा, प्रमोटर्स द्वारा बेची गई पूंजी का लगभग 30-40% हिस्सा दोबारा बाजार में रिनिवेस्ट भी हो रहा है।
आईपीओ और पीई फंड्स की भी भूमिका
पीई फंड्स और वेंचर कैपिटल इनवेस्टर्स अपनी निवेश अवधि के अंत में हैं, और 5-7 साल पुरानी हिस्सेदारियों को अब मोनेटाइज कर रहे हैं। कई आईपीओ में प्रमोटर्स और पीई फर्म्स की ओर से शेयर बिक्री देखी गई, लेकिन नई पूंजी जुटाने की दर उससे कम रही। इसका संकेत है कि बाजार में वैल्यूएशन आकर्षक बना हुआ है, और मुनाफावसूली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
रिटेल निवेशकों के लिए सलाह
शेयर बाजार में भारी बिकवाली के बावजूद, भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक और कॉर्पोरेट फंडामेंटल्स मजबूत हैं।
विशेषज्ञों की राय-एसआईपी (SIP) को जारी रखें, लॉन्ग टर्म निवेश दृष्टिकोण बनाए रखें, सुर्खियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें, फंडामेंटल्स पर भरोसा रखें। मेहता इक्विटीज के प्रशांत तापसे कहते हैं, "बाजार की मौजूदा स्थिति एक परिपक्व इकोसिस्टम का संकेत है, न कि संकट का। बड़े निवेशक अपने पोर्टफोलियो में रीबैलेंसिंग कर रहे हैं, जो स्वस्थ बाजार का लक्षण है।"