जगन्नाथ महाप्रसाद अब नहीं मिलेगा ऑनलाइन, सरकार ने किया सख्त फैसला
भारत
चेतना मंच
12 Aug 2025 12:16 PM
पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद की अब ऑनलाइन बिक्री नहीं हो सकेगी। ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि महाप्रसाद की पवित्रता और धार्मिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। Jagannath Mahaprasad
क्या था प्रस्ताव?
कुछ संगठनों ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) से अनुरोध किया था कि मंदिर के महाप्रसाद और सूखा प्रसाद (ड्राई प्रसाद) को ऑनलाइन माध्यम से दुनिया भर के श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाए। लेकिन सरकार ने यह कहते हुए प्रस्ताव ठुकरा दिया कि इस प्रक्रिया में प्रसाद की शुद्धता और धार्मिक भावना को नुकसान पहुंच सकता है।
कानून मंत्री का बयान
कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने सोमवार को कहा, "दुनिया भर के श्रद्धालुओं तक महाप्रसाद पहुंचाना एक अच्छा विचार है, लेकिन उसकी पवित्रता और पारंपरिक मान्यताओं को बनाए रखना अधिक जरूरी है। प्रसाद सिर्फ मंदिर परिसर में वितरित किया जाना चाहिए। ऑनलाइन माध्यम से इसकी बिक्री से इसके धार्मिक महत्व और सम्मान में कमी आ सकती है।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार न तो ऐसी किसी पहल का समर्थन करती है और न ही प्रचार करती है।
क्या ऑनलाइन बिक्री पर कोई कानूनी रोक है?
हरिचंदन ने स्पष्ट किया कि महाप्रसाद की ऑनलाइन बिक्री पर फिलहाल कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगानी हो, तो जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 में संशोधन करना पड़ेगा। मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिना अनुमति महाप्रसाद की ऑनलाइन बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का इस दिशा में कोई इरादा नहीं है और यह तय किया गया है कि प्रसाद की वितरण प्रणाली मंदिर परिसर तक ही सीमित रहेगी।
कानून मंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे महाप्रसाद प्राप्त करने के लिए स्वयं पुरी आकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें और प्रसाद प्राप्त करें। यह सिर्फ प्रसाद प्राप्त करने की नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव की बात है। हालांकि टेक्नोलॉजी के इस युग में धार्मिक प्रसाद की ऑनलाइन उपलब्धता एक सुविधाजनक विकल्प लग सकता है, लेकिन जगन्नाथ मंदिर जैसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल की पारंपरिक परंपराओं को बनाए रखना उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार का यह निर्णय धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। Jagannath Mahaprasad