
सार
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने एक बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि लेाकतंत्र के मंदिरों यानि लोकसभा व राज्यसभा को अपनी राजनीति के लिए ढाल बनाकर इस्तेमाल करना बड़ा पाप है। हमें देश के प्रत्येक नागरिक की चिंता करते हुए लोकतंत्र के मंदिरों की पवित्रता को कायम रखना होगा।
विस्तार
Jamia Millia Islamia, हिन्दी न्यूज़: दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के सार को संरक्षित और कायम रखने के लिए सभी से कार्य करने का आह्वान किया। मणिपुर हिंसा समेत अन्य मसलों पर संसद में हो रहे हंगामे पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि संसद को हर पल क्रियाशील न बनाने का कोई बहाना नहीं हो सकता है। इस देश के लोग इसके लिए भारी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब किसी विशेष दिन संसद में व्यवधान होता है, तो प्रश्नकाल नहीं हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता उत्पन्न करने का एक तंत्र है। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य है, इससे सरकार को काफी फायदा होता है, जब आप लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन के संदर्भ में सोचते हैं तो प्रश्नकाल न होने को कभी भी तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन असहमति को विरोध में बदलना लोकतंत्र के लिए अभिशाप से कम नहीं है।
Jamia Millia Islamia, चेतना मंच न्यूज़: उन्होंने आगे कहा कि 'विरोध' 'प्रतिशोध' में नहीं बदलना चाहिए। संवाद और विचार को ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता बताया। उपराष्ट्रपति का इशारा संसद के मानसून सत्र की तरफ था, जहां पर विपक्षी दल लगातार मणिपुर की हिंसा को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं और प्रधानमंत्री के सदन में आकर मामले में बयान दिए जाने की मांग कर रहे है। इस वजह से लगातार दोनों ही सदनों में कार्यवाही बाधित हो रही है। हंगामे की वजह से संसद को अपने तय कार्यक्रम से पहले ही स्थगित करना पड़ रहा है। Jamia Millia Islamia University