Tata Tiago vs Maruti WagonR: बेस मॉडल की लड़ाई में कौन है आगे? जानें

टाटा टियागो का बेस मॉडल मारुति वैगनआर की तुलना में काफी किफायती साबित होता है। Tata Tiago इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 4.57 लाख रुपये से होती है, जो टॉप वेरिएंट में जाकर 7.82 लाख रुपये तक पहुंचती है। Maruti WagonR वहीं, वैगनआर की शुरुआती कीमत लगभग 4.98 लाख रुपये से शुरू होती है।

Tata Tiago vs Maruti WagonR
माइलेज की दौड़ में WagonR है अजेय (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Mar 2026 01:26 PM
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Tata Tiago vs Maruti WagonR : भारतीय ऑटो बाजार में सस्ती और बजट फ्रेंडली कारों की मांग हमेशा बनी रहती है। इसी सेगमेंट में टाटा मोटर्स का 'Tiago' और मारुति सुजुकी का 'WagonR' दो सबसे ज्यादा लोकप्रिय चेहरे हैं। अक्सर ग्राहक घबराहट के साथ इस सवाल का सामना करते हैं कि आखिर इन दोनों में किस कार का बेस मॉडल खरीदना सबसे फायदेमंद रहेगा। अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो हम यहां आपको कीमत, फीचर्स और माइलेज के आधार पर इन दोनों कारों का विस्तृत विश्लेषण करा रहे हैं।

कीमत के मामले में कौन है आगे?

बात अगर कीमत की हो, तो टाटा टियागो का बेस मॉडल मारुति वैगनआर की तुलना में काफी किफायती साबित होता है। Tata Tiago इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत करीब 4.57 लाख रुपये से होती है, जो टॉप वेरिएंट में जाकर 7.82 लाख रुपये तक पहुंचती है। Maruti WagonR वहीं, वैगनआर की शुरुआती कीमत लगभग 4.98 लाख रुपये से शुरू होती है, जो टॉप मॉडल में 6.94 लाख रुपये तक जाती है। स्पष्ट है कि जिन ग्राहकों का बजट सीमित है और वे एंट्री-लेवल हैचबैक की तलाश में हैं, उनके लिए टियागो एक बेहतर विकल्प हो सकता है। दोनों कारें पेट्रोल और CNG फ्यूल ऑप्शन के साथ उपलब्ध हैं, जो खरीदारों को अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनने की आजादी देती हैं।

फीचर्स और प्रीमियम फील

कार के अंदर के फीचर्स और प्रीमियम अहसास के मामले में टाटा टियागो अपनी एक अलग पहचान बनाती है।Tiago की खासियत टियागो के बेस वेरिएंट में भी अच्छे फीचर्स मिलते हैं। इसके हायर वेरिएंट में तो 7-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 10.25-इंच डिस्प्ले, 8-स्पीकर हार्मन साउंड सिस्टम, ऑटोमैटिक एसी, 15-इंच अलॉय व्हील्स और प्रोजेक्टर हेडलैंप्स जैसे शानदार फीचर्स दिए गए हैं। इसके अलावा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और प्रीमियम सीट्स इसे और आकर्षक बनाते हैं। WagonR के फीचर्स मारुति वैगनआर में भी कई उपयोगी फीचर्स जैसे 7-इंच टचस्क्रीन, 4-स्पीकर म्यूजिक सिस्टम, स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल्स और 14-इंच अलॉय व्हील्स मिलते हैं। टॉप वेरिएंट में स्मार्टप्ले स्टूडियो और ड्यूल-टोन कलर ऑप्शन भी है। लेकिन अगर टेक्नोलॉजी और प्रीमियम फील की बात की जाए, तो Tiago इस दौड़ में WagonR से थोड़ा आगे नजर आती है।

माइलेज की दौड़ में कौन है बादशाह?

भारतीय ग्राहकों के लिए माइलेज सबसे बड़ा फैक्टर होता है, और इस मामले में मारुति वैगनआर को बढ़त मिलती है। Tata Tiago Mileage इसका पेट्रोल वेरिएंट लगभग 19 से 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है। CNG वेरिएंट में यह आंकड़ा मैनुअल के साथ 26.49 किमी/किग्रा और AMT के साथ 28.06 किमी/किग्रा तक पहुंच जाता है। इस सेगमेंट में Tiago CNG के साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन देने वाली पहली कार है, जो इसका बड़ा फायदा है। Maruti WagonR Mileage वैगनआर का पेट्रोल वर्जन 25.19 किमी/लीटर तक का माइलेज देता है, जबकि CNG वेरिएंट 34.05 किमी/किग्रा तक का शानदार माइलेज देता है। हालांकि, इसका CNG मॉडल सिर्फ मैनुअल ट्रांसमिशन में ही उपलब्ध है।

अंत में फैसला आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। अगर आपका फोकस सिर्फ माइलेज और शहरी इस्तेमाल पर है, तो Maruti WagonR CNG बेहतरीन विकल्प है। वहीं, अगर आप कम बजट में ज्यादा फीचर्स, बेहतर बिल्ड क्वालिटी और प्रीमियम फील चाहते हैं, तो Tata Tiago आपके लिए सबसे सही गाड़ी साबित हो सकती है। Tata Tiago vs Maruti WagonR

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महिलाओं के समान अधिकारों पर SC की बड़ी टिप्पणी, UCC को बताया रास्ता

मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया कि अब इस संवेदनशील और लंबे समय से लंबित विषय पर गंभीर पहल की जरूरत है।

UCC पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
UCC पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 12:36 PM
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UCC : देश में महिलाओं के समान अधिकार, पर्सनल लॉ और कानूनी समानता को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया कि अब इस संवेदनशील और लंबे समय से लंबित विषय पर गंभीर पहल की जरूरत है। अदालत की टिप्पणी ने न सिर्फ कानूनी हलकों में हलचल बढ़ाई है, बल्कि महिलाओं के अधिकार, समानता और न्याय की बहस को भी नई धार दे दी है।

विधायिका को पहल करने का संकेत

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि अलग-अलग पर्सनल लॉ से उत्पन्न जटिलताओं का स्थायी समाधान न्यायालय के आदेश से नहीं, बल्कि विधायिका द्वारा बनाए गए कानून से ही संभव है। अदालत ने कहा कि यदि व्यक्तिगत कानूनों को सीधे अमान्य घोषित कर दिया जाए तो इससे कानूनी शून्य की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि संसद इस विषय पर स्पष्ट कानून बनाए।

महिलाओं के समान अधिकार के लिए UCC पर जोर

मुस्लिम महिलाओं को उत्तराधिकार में समान अधिकार दिलाने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एक प्रभावी तरीका समान नागरिक संहिता हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ से जुड़े कई प्रावधान ऐसे हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को समान अधिकार मिलने में कठिनाई होती है। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पर्सनल लॉ के आधार पर होने वाले सभी द्विविवाह संबंधों को अमान्य घोषित किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर अंतिम निर्णय लेने के लिए विधायिका की भूमिका अहम है, क्योंकि मौलिक कर्तव्यों और समानता के सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाना संसद का अधिकार क्षेत्र है।

याचिका में संशोधन करने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं को उत्तराधिकार से वंचित किए जाने के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 को चुनौती देने वाली याचिका में संशोधन का सुझाव भी दिया। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से पूछा कि याचिका को अधिक व्यापक रूप देने के लिए उसमें संशोधन क्यों नहीं किया जाता। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल 1937 के अधिनियम तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा संवैधानिक सवाल भी है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को भरोसा दिलाया कि याचिका में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी और याचिकाकर्ता को संशोधित याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। UCC

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जानिए, दुनिया का यह कोना जहाँ 'गरीब' शब्द ही अनजान

यहां आपको गगनचुंबी इमारतों के बीच हाथ फैलाए कोई भिखारी नहीं मिलेगा। इसकी वजह यहां की सरकार की फौलादी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है, जो मुसीबत आने से पहले ही नागरिकों की झोली भर देती है। स्विट्जरलैंड में अत्यधिक गरीबी का न मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की सोची-समझी नीति का नतीजा है।

The word 'poor' is unknown
जहां गरीबी है नामोनिशान नहीं (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Mar 2026 12:25 PM
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Poverty in Switzerland is not a coincidence : दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा देश है, जहां 'गरीबी' शब्द मानो शब्दकोष से बाहर होता जा रहा है। यूरोप का स्वर्ग कहा जाने वाला स्विट्जरलैंड सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीले पहाड़ों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि अपनी ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए भी जाना जाता है, जहां हर नागरिक नवाबों जैसी जिंदगी जीता है।

सड़कों पर नहीं दिखते हाथ फैलाए लोग

यहां आपको गगनचुंबी इमारतों के बीच हाथ फैलाए कोई भिखारी नहीं मिलेगा। इसकी वजह यहां की सरकार की फौलादी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है, जो मुसीबत आने से पहले ही नागरिकों की झोली भर देती है। स्विट्जरलैंड में अत्यधिक गरीबी का न मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की सोची-समझी नीति का नतीजा है। हालांकि वहां कम आय वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं जैसे भोजन और छत के लिए नहीं तड़पता है।

बेरोजगारी बीमा: नौकरी जाने पर मिलता है 80% वेतन

इस देश की सबसे बड़ी खूबी इसका बेरोजगारी बीमा है। अगर किसी नागरिक की नौकरी चली जाती है, तो वह सड़क पर नहीं आता। सरकार उसे पिछले वेतन का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा बेरोजगारी भत्ते के रूप में एक निश्चित समय तक देती रहती है। सिर्फ पैसा देकर ही नहीं, प्रशासन उस व्यक्ति को नई नौकरी दिलाने के लिए विशेष ट्रेनिंग और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाता है, ताकि वह जल्द से जल्द मुख्यधारा में लौट सके।

झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान नहीं

स्विट्जरलैंड में घर का किराया किसी के लिए बोझ न बने, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार मिलकर काम करते हैं। वहां बड़े पैमाने पर हाउसिंग कोऑपरेटिव और सब्सिडी योजनाएं चलाई जाती हैं, जो मध्यम और कम आय वाले परिवारों को बेहद सस्ती दरों पर मकान उपलब्ध कराती हैं। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि देश के किसी भी कोने में कोई भी व्यक्ति बिना छत के न सोए। इसी कारण वहां झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान तक नहीं मिलता है।

सेहत का मामला: इलाज के लिए कर्ज में नहीं डूबते लोग

स्वास्थ्य के मामले में स्विट्जरलैंड दुनिया के सबसे सख्त और सुरक्षित देशों में से एक है। यहां हर नागरिक के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जो लोग प्रीमियम भरने में सक्षम नहीं होते, सरकार उन्हें मोटी सब्सिडी देती है, ताकि इलाज हर किसी की पहुंच में रहे। इस व्यवस्था के कारण वहां का हर व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या कम आय वाला, दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा पाता है और बीमारी की वजह से कर्ज के जाल में नहीं फंसता है।

'खुशहाल' देश में नवाबों जैसी जिंदगी

ऊंचा जीवन स्तर और औसत वेतन की वजह से स्विट्जरलैंड अक्सर दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में टॉप पर रहता है। यहां की सरकार का यह अहम फैसला कि समाज का सबसे निचला तबका भी सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन जिए, इसे दुनिया का सबसे 'रसूख' देश बनाता है। Poverty in Switzerland is not a coincidence

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