प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 और 30 अगस्त को जापान के दौरे पर हैं जो PM Modi का आठवां विजिट होगा। भारत और जापान के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों से लेकर आधुनिक आर्थिक साझेदारी तक गहरा रिश्ता है। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की संभावना है। India Japan Relations
जापान की कौन-कौन सी चीजें इस्तेमाल करते हैं भारतीय?
जापान की कई चीजें भारतीयों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। जापानी कार ब्रांड्स जैसे टोयोटा, होंडा, निसान और सुजुकी भारत में बेहद लोकप्रिय हैं और मारुति सुजुकी का नाम तो लगभग हर घर में जाना-पहचाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स में सोनी, पैनासोनिक और तोशिबा जैसे ब्रांडों ने भारतीय बाजार पर अपनी पकड़ बनाई है। इसके अलावा, निनटेंडो और सोनी प्लेस्टेशन जैसे गेमिंग कंसोल भारतीय युवाओं के बीच काफी प्रसिद्ध हैं। जापानी एनिमेशन जैसे डोरेमोन, शिनचैन और पोकेमॉन भी बच्चों और बड़ों दोनों के बीच खूब पसंद किए जाते हैं।
कब शुरू हुआ भारत-जापान का संबंध
भारत-जापान संबंध 1952 में औपचारिक रूप से शुरू हुए थे, जब भारत ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान पर लगी पाबंदियां हटाने में मदद की। इसके बाद से दोनों देशों ने अपने रिश्तों को लगातार मजबूत किया। 2001 में इस रिश्ते को वैश्विक साझेदारी का दर्जा मिला जबकि 2006 में इसे रणनीतिक साझेदारी का रूप दिया गया। 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे के बीच मजबूत सहयोग ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयां दी हैं।
दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार
व्यापार के लिहाज से भी दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। जापान से भारत को ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और स्टील उत्पाद मिलते हैं, जबकि भारत से जापान को पेट्रोकैमिकल्स, कपास, लौह अयस्क और समुद्री उत्पाद निर्यात होते हैं। भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान मात्रा लगभग 21 अरब डॉलर है।
भारत में निवेश भी खासा बढ़ा
जापान का भारत में निवेश भी खासा बढ़ा है। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं जापानी तकनीक और वित्तीय सहयोग पर आधारित हैं। रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश नियमित नौसैनिक अभ्यास करते हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है।
जापान और भारत के बीच संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं बल्कि आम जनता के बीच भी सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान तेजी से बढ़ रहा है। जापान में भारतीय आईटी पेशेवर और योग शिक्षक सक्रिय हैं, वहीं भारत में जापानी भाषा सीखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस तरह, जापान की तकनीक, संस्कृति और आर्थिक ताकत ने भारतीय जीवनशैली में गहरा प्रभाव डाला है। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के बीच सहयोग और भी व्यापक और गहरा होने की उम्मीद है जो सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और विकास के नए अध्याय की शुरुआत करेगा। India Japan Relations