जेडीयू ने भाजपा सरकार से समर्थन लिया वापस, जानें क्या हुआ
JDU's Shock
भारत
चेतना मंच
22 Jan 2025 11:46 PM
JDU's Shock : नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) ने अब अपना मन बना लिया है और वो अपने हिसाब से अपने समर्थन का गुणा भाग करने लगे हैं। अब एक नए घटनाक्रम में एक कड़ा संदेश देते हुए मणिपुर में एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से जेडीयू ने अपना समर्थन वापस ले लिया है, इससे भाजपा सरकार को झटका लगा है। हालांकि मणिपुर में जदयू के कुल छह विधायक थे जिसमें से पांच विधायक पहले ही भाजपा तोड़ चुकी है यानि भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अब जदयू के पास केवल एक विधायक था, और उसने भी अपना समर्थन वापस लेकर विपक्ष की बेंच पर बैठना स्वीकार कर लिया है। हालांकि इस घटनाक्रम का सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह एक कड़ा संदेश है क्योंकि जेडीयू केंद्र और बिहार में भाजपा की प्रमुख सहयोगी है। आने वाले समय में अगर भाजपा सचेत नहीं हुई तो जेडीयू कोई नया गुल खिला सकती है।
संगमा के बाद अब जेडीयू का झटका
इस नये घटनाक्रम से ठीक कुछ महीने पहले कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी द्वारा बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और अब उसी तर्ज पर जेडीयू जो भाजपा की केंद्र में भी सहयोगी है ने झटका देते हुए किनारा कर लिया है। जबकि सर्वविदित है कि मणिपुर में 2022 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने छह सीटें जीतीं, लेकिन चुनाव के कुछ महीनों बाद, पांच विधायक भाजपा में चले गए, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी की संख्या मजबूत हो गई। 60 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के 37 विधायक हैं। इसे नागा पीपुल्स फ्रंट के पांच विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसे सरकार बनाने के लिए बहुमत मिला हुआ है।
जदयू ने राज्यपाल को लिखा पत्र
जदयू ने लिखा कि मणिपुर में चुनाव के कुछ महीनों के बाद जनता दल यूनाइटेड के पांच विधायक भाजपा में शामिल हो गए। पांच विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत मुकदमा स्पीकर के न्यायाधिकरण के समक्ष मामला लंबित है। जनता दल (यूनाइटेड) के भारत ब्लॉक का हिस्सा बनने के बाद, जनता दल (यूनाइटेड) ने माननीय राज्यपाल, सदन के नेता (मुख्यमंत्री) और अध्यक्ष के कार्यालय को सूचित करके भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। भले ही इस समय वहां जदयू का एक ही विधायक है लेकिन यह भाजपा के लिए एक कड़ा संदेश है। पत्र में यह कहा गया है कि यह दोहराया जाता है कि जनता दल (यूनाइटेड), मणिपुर इकाई मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का समर्थन नहीं करती है, और हमारे एकमात्र विधायक, मोहम्मद अब्दुल नासिर को सदन में विपक्षी विधायक के रूप में माना जाएगा। इसलिए विधानसभा के अंतिम सत्र में अध्यक्ष द्वारा इन्हें विपक्ष की बेंच में बैठाया जाए।
बिहार चुनाव से पहले जदयू ने दिया झटका
इस साल आम चुनाव में 12 सीटें जीतने वाली नीतीश कुमार की जेडीयू उन प्रमुख सहयोगियों में से है, जिनके समर्थन से भाजपा को इस बार अपनी सीटों की संख्या में गिरावट के बाद बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में मदद मिली। भाजपा और जेडीयू बिहार में भी सहयोगी हैं, जहां इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिलहाल एनडीए के साथ हैं, लेकिन पाला बदलने का उनका अपना रिकॉर्ड रहा है। मणिपुर में जेडीयू द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेना बिहार चुनाव में भाजपा को खबरदार करने के लिए एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जदयू ने फैसला पलटा
मणिपुर के जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने के ऐलान के बाद पार्टी डैमेज कंट्रोल में उतरी है। अब पार्टी ने मणिपुर इकाई के अध्यक्ष क्षेत्रमयुम बीरेन सिंह को भी बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने मणिपुर में एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को समर्थन देना जारी रखने का ऐलान किया है। जदयू ने कहा कि यह बिना पार्टी से विचार किए हुए ही लिया गया फैसला था, इसलिए इस अनुशासनहीनता के लिए मणिपुर के पार्टी के प्रमुख को बर्खास्त कर दिया गया है। जैसे ही यह फैसला आया था चारों ओर तहलका मच गया था।