Jeevit Shaheed : जीवित शहीद यह शब्द सुनकर आप चौंक गए होंगे। आप सोच सकते हैं कि शहीद होने के बाद कोई व्यक्ति जीवित कैसे रह सकता है। यह परम सत्य है कि भारत में एक ऐसा व्यक्ति मौजूद है जिसे जीवित रहते हुए शहीद होने का गौरव प्राप्त है। यदि आप इस जीवित शहीद को नहीं जानते हैं तो सच में आप भारत के विषय में कुछ भी नहीं जानते। हम आपको बता रहे हैं जीवित शहीद के विषय में वह भी पूरे विस्तार के साथ।
पूरा देश उन्हें जीवित शहीद कहता है, आप भी कहेंगे
हम बात कर रहे हैं सी सदानंदन मास्टर जी की। सी सदानंदन मास्टर जी को हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। सी सदानंदन मास्टर जी जल्दी ही भारत की सबसे बड़ी पंचायत राज्यसभा में नजर आएंगे। जीवित शहीद के रूप में स्थापित सी सदानंदन मास्टर के जीवन की सबसे काली रात से बात शुरू करते हें। उनके जीवन की उस काली रात के विषय में सुनकर आप भी सन्नाटे में पड़ जाएंगे।
जीवित शहीद के जीवन की वह काली रात
आपको बता दें कि वह 25 जनवरी, 1994 की रात थी। पूरा देश लोकतंत्र के पर्व यानी गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहा था। रात के करीब 8:30 बजे थे, तभी कट्टरपंथियों का दल लोकतंत्र के हिमायती एक तीस वर्षीय शिक्षक पर काल बनकर टूट पड़ा। हमलावरों ने पहले बम फोड़े, फिर उनके दोनों पैर काट डाले, ताकि वह लोगों को लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा न दे सकें। दरअसल, सीपीआई-एम की छात्र इकाई स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का साथ छोडक़र उन्होंने जैसे ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके आनुषंगिक संगठनों से अपना नाता जोड़ा, वैसे ही वह अपने पुराने वामपंथी साथियों के लिए जानी दुश्मन बन गए। यह तो उनका जीवट ही था कि सीपीआई-एम (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्कि्सस्ट) से जुड़े हमलावरों से वह बच गए और आज भी कृत्रिम पैरों के सहारे समाज को जोडऩे की अलख जगा रहे हैं। वह शिक्षक हैं सी सदानंदन मास्टर, जिन्हें हाल ही में राष्ट्रपति ने समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है।
जीवित शहीद की शिक्षा और शुरूआत
सी सदानंदन मास्टर का जन्म केरल के कन्नूर जिले के पेरिचेरी गांव में 1964 में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मत्तनूर के शिवपुरम हायर सेकंडरी स्कूल से हासिल की। इसके बाद कन्नूर यूनिवर्सिटी से संबद्ध पजासी राजा एनएसएस कॉलेज से प्री-डिग्री कोर्स किया और सेंट मैरी कॉलेज, कुतुपरमंबा से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने गौहाटी यूनिवर्सिटी से बीकॉम और कालीकट यूनिवर्सिटी से बीएड की डिग्री हासिल की। इसके बाद त्रिसूर जिले के हाईस्कूल में बतौर शिक्षक उनकी नौकरी लग गई। उन्होंने श्रीदुर्गा विलासम हायर सेकंडरी स्कूल में सोशल साइंस पढ़ाया। वह वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुए। सदानंदन मास्टर जहां रहते और पढ़ते थे, वह वामपंथ का गढ़ था।उनके पिता कुंजीरामन समेत पूरा परिवार वामपंथ का समर्थक था, इसी वजह से वह भी पढ़ाई के दौरान SFI के साथ जुड़ गए, लेकिन उन्हें वामपंथ की राह पसंद नहीं थी और 1984 में वह संघ के आनुषंगिक छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हो गए। बाद में वह सीधे संघ से जुड़ गए और एर्नाकुलम में बौद्धिक प्रमुख बनाए गए। विभिन्न दायित्वों को निभाते हुए अखिल भारतीय स्तर पर संघ के कार्यों में उनकी भागीदारी बढ़ती गई और स्कूल में पढ़ाने के साथ ही वह केरल में संघ के कामों को बढ़ाने लगे।
जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी तारीफ
सदानंदन मास्टर आरएस में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई जिम्मेदारियां निभाने के बाद भाजपा से जुड़ गए। वह 2016 और 2021 में भाजपा के टिकट पर कुनुपरखा क्षेत्र में विधानसभा का चुनाव लड़े। हालांकि, यह हार गए। 2016 में उनके समर्थन में प्रचार करने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे और उनका हाथ पकडक़र उन्हें साहस और अन्याय के आगे में झुकने की प्रतिमूर्ति बताया था। राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने पर प्रधानमंत्री ने उसके लिए लिखा, 'हिंसा और धमकी उनके हौसले को नहीं डिग सकी।’ सी सदानंदन पर हुए हमले ती मटना में 12 लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया था। इनमें से आठ लोगों को जान से मारने के प्रयास के अपराध में नाजा हुई। कैरल उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियुक्तों के साथ साथ मावसंवादी पार्टी के कार्यवातों भी पार्टी छोडऩे के बाद से उनके प्रति शत्रुतपूर्ण रवैया अपना रहे थे। ट्रायल कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय में कहा, 'सदानंदन एक करिश्माई और कुशल नेता के रूप में इलाके में अपनी पहचान बना रहे थे और उनके प्रयासों से क्षेत्र में उनके संगठन को अपनी जड़ों को फैलाने व मजबूत करने में अवद मिली, जिसे प्रतिद्वंदी पार्टी स्वीकार नहीं कर सकी।
पढ़ाना नहीं छोड़ा इस जीवित शहीद ने
भारतीय जनता पार्टी और संघ कार्यकर्ता सी सदानंदन मास्टर को 'जीवित शहीद' तक कहते हैं। सदानंदन पर हमले के बाद उसी वर्ष कन्जूर में केवी सुधीश नाम के एक और पूर्व एसएफआई कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी। इस पर सदानंदन ने कहा था, यदि मैंने पैर, नहीं खोए होते, तो सुधीश की मौत नहीं हुई होती।' सदानंदन पर जानलेवा हमला होने के बाद भी उन्हें कई धमकियां मिलती रहीं, लेकिन उन्होंने अपने साहस और धैर्य का परिचय देते हुए सेवानिवृत्त होने तक न तो पढ़ाना छोड़ा और न ही RSS का काम करने से पीछे हटे। सदानंदन मास्टर की पत्नी वनिता रानी भी एक शिक्षिका है। उनकी बेटी यमुना भारती बीटेक की पढ़ाई कर रही है। सदानंदन राज्यसभा सदस्य मनोनीत होने से पहले केरल की भाजपा इकाई के उपाध्यक्ष बनाए गए थे। राज्यसभा सदस्य बनार जाने पर केरल के कुछ कम्युनिस्ट नेताओं ने कहा कि इसरों भाजपा को राज्य में कुछ हासिल नहीं होगा। सदानंदन कहते हैं कि वह केरल में हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। उल्लेखनीय है कि एनसीआरवी 2022 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड और बिहार के बाद केरल में सबसे ज्यादा राजनीतिक हत्याएं हुई है।