जज हुए आगबबूला : हिमंता सरकार ने सीमेंट कंपनी को दी, आधा जिला के बराबर जमीन
भारत
RP Raghuvanshi
26 Nov 2025 05:27 PM
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RP Raghuvanshi
26 Nov 2025 05:27 PM
असम हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक जज की नाराजगी चर्चा का विषय बन गई है। असम हाई कोर्ट के जज संजय कुमार मेधी ने हिमंता बिस्वा सरमा सरकार द्वारा महाबल सीमेंट्स कंपनी को 3,000 बीघा जमीन आवंटित करने पर तीखी नाराजगी जताई। जज ने नाराजगी जताते हुए कहा, यह कोई मजाक है क्या? लगभग आधा जिला ही एक कंपनी को सौंप दिया गया। दरअसल असम के दीमा हसाओ जिले की यह जमीन वहां के स्थानीय आदिवासियों के हितों के लिए सुरक्षित और संरक्षित थी, जिसे मनमाने तरीके से एक सीमेंट कंपनी को दे दिया गया। जिसकी वजह से जज ने अपनी नाराजगी असम सरकार के खिलाफ व्यक्त की है। Judge's Displeasure :
फैसला अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक
पीठ ने कहा कि यह फैसला अप्रत्याशित और आश्चर्यजनक है, और ऐसा प्रतीत होता है कि महाबल सीमेंट्स कंपनी की शक्ति और प्रभाव के चलते यह कदम उठाया गया। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि दीमा हसाओ जिले की यह जमीन संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आती है, जो स्थानीय आदिवासियों के हितों की रक्षा करती है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि आवंटित जमीन में उमरांगसो क्षेत्र भी शामिल है, जिसे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है।
अदालत ने जमीन के दस्तावेज और आवंटन नीति पेश करने को कहा
अदालत ने उत्तरी कछार हिल्स स्वायत्त परिषद को अगले सुनवाई तक जमीन के दस्तावेज और आवंटन नीति पेश करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी। सीमेंट कंपनी के वकील जी. गोस्वामी ने कहा कि जमीन 30 साल के पट्टे पर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से दी गई है और उनका उद्देश्य किसी की जमीन लेने का नहीं है। वहीं, आदिवासियों के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि उनकी जमीन सुरक्षित रहे और उन्हें हटाया न जाए।