पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले माहौल गर्म होता जा रहा है। मालदा में प्रदर्शन के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि 7 न्यायिक मजिस्ट्रेटों को करीब 8 घंटे तक भीड़ ने घेरकर बंधक बना लिया। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।

Kolkata/New Delhi : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले माहौल गर्म होता जा रहा है। मालदा में प्रदर्शन के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि 7 न्यायिक मजिस्ट्रेटों को करीब 8 घंटे तक भीड़ ने घेरकर बंधक बना लिया। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर बाधा हैं और किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने यह भी साफ किया कि मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, लेकिन स्थिति बेहद चिंताजनक है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य में एसआईआर हटाने को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा था। इसी दौरान शाम करीब 5 बजे प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया और रात 11 बजे तक उन्हें निकलने नहीं दिया।
इस मामले को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया।
उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और न्यायपालिका की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने बताया कि कई अधिकारियों का राज्य से बाहर तबादला किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमने ऐसा ध्रुवीकृत राज्य पहले कभी नहीं देखा। कोर्ट ने राज्य के एडवोकेट जनरल को भी फटकार लगाई और कहा कि यहां हर मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बल तैनात किए जाएं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई या एनआईए जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जा सकती है। यहां न्यायपालिका की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठ रहा है। चुनाव से पहले बढ़ता राजनीतिक तनाव व कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई गई। और केंद्र बनाम राज्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।