सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस जज अभय ओका के एक बयान ने बड़ा बवाल मचा दिया है। हर तरफ अभय ओका के बयान की चर्चा हो रही है। बड़ी संख्या में भारत के नागरिक जस्टिस अभय ओका के बयान का समर्थन करते हुए सुनाई पड़ रहे हैं। कुछ नागरिक ऐसे भी हैं जिन्हें न्यायमूर्ति अभय ओका के बयान में राजनीति नजर आ रही है।अभय ओका के बयान का विरोध करने वालों को उनके बयान में राजनीतिक एजेंडा नजर आ रहा है। Justice Abhay Oka
क्या बयान दिया है जस्टिस अभय ओका ने ?
भारत के सुप्रीम कोर्ट से रिटायर जज जस्टिस अभय ओका का एक इंटरव्यू चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने इंटरव्यू में जस्टिस अभय ओका ने बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा है कि भारत में लोगों के बोलने की आजादी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इंटरव्यू में अभय ओका ने कहा है कि लोगों की बोलने की आजादी और उनकी अपनी आजादी खतरे में है। लोगों के मौलिक अधिकार खतरे में है। इंटरव्यू में उन्होंने न्यायपालिका में बदलाव और जजों की नियुक्ति के तरीके पर भी बात की। उनका मानना है कि सरकारें हमेशा से लोगों के अधिकारों को छीनने की कोशिश करती रही हैं। जस्टिस ओका का मानना है कि सरकारें हमेशा से लोगों के मौलिक अधिकारों पर हमला करती रही हैं।
उन्होंने कहा - सत्ता में चाहे कोई भी पार्टी हो, अगर आप इतिहास देखें, तो सरकारों की इन मौलिक अधिकारों पर हमला करने की प्रवृत्ति हमेशा रही है। इसका मतलब है कि कोई भी सरकार हो, वो लोगों के अधिकारों को कम करने की कोशिश करती रहती है। जस्टिस ओका ने न्यायपालिका में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। इससे लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ेगा। जस्टिस ओका ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।
जस्टिस अभय ओका का पूरा नाम अभय श्रीनिवास ओका है। उनका जन्म 25 मई 1960 को हुआ था। जस्टिस अभय ओका ने महाराष्ट्र के ठाणे के जिला न्यायालय में अपने पिता के चैंबर में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी। अगस्त 2003 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और नवंबर 2005 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। मई 2019 में, उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और अगस्त 2021 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अभय ओका इसी साल 24 मई 2025 को रिटायर हुए हैं।
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