भगवान परशुराम थे दुनिया के पहले कांवड़िया, गढ़मुक्तेश्वर से लाए थे कावड़
Kanwar Yatra 2024
भारत
चेतना मंच
16 Jul 2024 09:33 PM
Kanwar Yatra 2024 : कांवड़ यात्रा 2024 की शुरूआत हो चुकी है। भगवान शिव के लाखों भक्त कांवड़ में गंगा जल भर कर भोलेनाथ का अभिषेक करने के लिए निकल पड़े हैं। कांवड़ यात्रा 2024 का मुख्य आयोजन 22 जुलाई से 15 अगस्त तक चलेगा। हम आपको बता रहे हैं कि दुनिया में सबसे पहली कांवड़ यात्रा किसने की थी ?
भगवान परशुराम ने की थी पहली कांवड़ यात्रा
पुराणों में मिले प्रमाण बताते हैं कि दुनिया में सबसे पहली कांवड़ यात्रा भगवान परशुराम ने की थी। इसी कारण परशुराम को दुनिया का पहला कांवडिय़ा भी कहा जाता है। इस दौरान परशुराम जी ने गढ़मुक्तेश्वर धाम से कांवड़ द्वारा पवित्र गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित 'पुरा महादेव' का अभिषेक किया था। तभी कांवड़ यात्रा करने की परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में गढ़मुक्तेश्वर को ब्रजघाट के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थापित पुरा महादेव मंदिर की महिमा इतनी अधिक है कि हर साल सावन में पुरा महादेव मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए लाखों कांवड़िए पहुंचते हैं।
Kanwar Yatra 2024
जहां से परशुराम जी कांवड़ द्वारा गंगाजल लेकर आए थे, वह स्थान भी उत्तर प्रदेश में है। इस स्थान का नाम गढ़मुक्तेश्वर है। इस स्थान को लेकर भी एक पौराणिक कथा लोकप्रिय है। शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार महर्षि दुर्वासा मंदराचल पर्वत पर तपस्या कर रहे थे। तभी भगवान शिव के गण घूमते हुए वहां पहुंचे और महर्षि दुर्वासा का उपहास करने लगे। इससे महर्षि क्रोधित हो गए और उन्होंने गणों को पिशाच बनने का श्राप दे दिया। तब भगवान शिव के दर्शन करने से शिवगणों को पिशाच योनि से मुक्ति मिली। इसलिए इस मंदिर को 'गढ़मुक्तेश्वर' अर्थात गणों की मुक्ति करने वाले ईश्वर के नाम से जाना जाता है। Kanwar Yatra 2024