
बाबा के पास है गाड़ियों का जखीरा
आपको बता दें कि सभी गाड़ियां सफेद रंग की हैं और के पीछे ‘करौली सरकार’ का स्टीकर लगा हुआ है। बाबा के फ्लीट में एक रेंजरोवर की डिफेंडर गाड़ी है, जिससे बाबा खुद चलते हैं। इसकी कीमत दो करोड़ रुपये के ऊपर है और उसके ऊपर मोडिफिकेशंस अलग से हैं। बाबा का परिवार आश्रम से बाहर गया हुआ था, जिनके साथ चार से पांच गाड़ियों का काफिला चलता है। इसके बाद भी अभी 12 से 13 लग्जरी गाड़ियां गैराज में खड़ी हुई हैं। इस गैराज में 30 गाड़ियां खड़े होने की जगह है। साथ में बाबा के बाउंसर और सिक्योरिटी के चलने के लिए गाड़ियां अलग से हैं, जिनमें फोर्ड इंडेवर, किया कार्निवल, टोयोटा इनोवा और फॉर्च्यूनर गाड़ियां शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, हाल ही में बाबा बीएमडब्ल्यू के शोरूम खुद गए थे और उन्होंने यहां बीएमडब्ल्यू की 7-सीरीज गाड़ी देखी थी. चर्चा है कि बाबा अब ये गाड़ी भी खरीद सकते हैं।
खुद लगा रखीं पूजा सामग्री की फैक्ट्रियां
आपको बता दें कि बाबा एक दिन के हवन का डेढ़ लाख रुपये लेते हैं। पूजा सामग्री की फैक्ट्रियां बाबा ने खुद लगा रखी हैं, जहां पर सब सामान बनता है और उसे अपने ही रेट पर आश्रम में बेचा जाता है। कैंटीन से लेकर आइसक्रीम पार्लर तक ट्रैवल टिकट डेस्क और होटल बुकिंग के काउंटर सब आश्रम में मौजूद हैं। आश्रम में ठहरने के लिए एसी और नॉन एसी कमरे भी उपलब्ध हैं। एसी कमरे 2000 से 2500 के बीच हैं। अगर परिवार के लिए स्वीट बुक करना है, तो उसके लिए ज्यादा रुपये देने होंगे। इसके लिए आश्रम के बाहर ही बोर्ड लगा है।
दो नए आश्रम बनाने की तैयारी
बाबा दो नए आश्रम बनाने की तैयारी में हैं। इसमें एक का निर्माण पिपरगवां स्थित उनके आलीशान किले वाले आश्रम के ठीक सामने हो रहा है। यहां पूरी जमीन ऊंची चहारदीवारी से घेर ली गई और पिलर खड़े किए जा रहे हैं। दूसरा आश्रम बनाने के लिए लगभग 1.4 किलोमीटर दूर मेन रोड पर जमीन ली गई है। इसे कंटीले तारों से घेरकर गेट लगाया जा चुका है। साथ ही बाबा ने उन्नाव में भी मुंहमांगे दामों में जमीन खरीद ली है। कानपुर में अपनी ताकत और पहुंच के बल पर बड़ी-बड़ी जमीनें खरीदी हैं। लीं। इस पर बाबा बड़े गर्व से कहते हैं कि मैंने अपने पैसे से जमीनें खरीदी हैं। उनका कहना है कि आश्रम आने वाले लोगों को लाभ पहुंच रहा है, अब लोग ज्यादा संख्या में आ रहे हैं, इसलिए उनके ठहरने और संकल्प साधना के लिए और जमीन की जरूरत थी। मैं किसी से यह नहीं कहता कि हाजिरी लगाओ। यहां लोग खुद आते हैं। पीड़ा से मुक्त होने के बाद मेरे शिष्य बन जाते हैं। श्री राधारमण संप्रदाय से जुड़ जाते हैं।
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Karauli Baba: Karauli Baba lives a royal life, all the facilities present in the ashram[/caption]