किश्तवाड़ के बाद अब कठुआ में बादल फटने से तबाही, 7 की मौत
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:18 AM
Kathua Incident : जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। किश्तवाड़ में बादल फटने से हुई भारी तबाही के महज 48 घंटे बाद कठुआ जिले में भी आसमान से आफत बरसी। शनिवार सुबह कठुआ के कई इलाकों में बादल फटने से कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यहां तक कि कठुआ पुलिस स्टेशन तक पानी और मलबे के चलते प्रभावित हो गया। फिलहाल प्रशासन, सेना और अर्धसैनिक बलों की टीमें राहत-बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
जोध घाटी में सबसे ज्यादा तबाही
कठुआ जिले के राजबाग इलाके के जोध गांव को इस आपदा ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। अचानक उमड़े सैलाब और मलबे की तेज धार ने कई मकानों को तहस-नहस कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पानी इतनी रफ़्तार से आया कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई परिवारों को मजबूरन अपने घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों में शरण लेनी पड़ी। इस भीषण आपदा से कठुआ और उसके आसपास के पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। नदियों और नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने से कई संपर्क मार्ग बह गए हैं। कई गांव अब बाहरी दुनिया से कट गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों से ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
केंद्रीय मंत्री ने जताई चिंता
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घटना पर शोक जताते हुए कहा कि उन्होंने कठुआ के एसएसपी शोभित सक्सेना से लगातार संपर्क बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि नागरिक प्रशासन, सेना और अर्धसैनिक बल त्वरित रूप से राहत-बचाव कार्य में जुट गए हैं। डॉ. सिंह ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित निर्माण और प्राकृतिक जलमार्गों से छेड़छाड़ है। ऐसी घटनाएं न केवल तत्काल जनहानि का कारण बनती हैं बल्कि लंबे समय तक इलाके की आधारभूत संरचना और जनजीवन को प्रभावित करती हैं।
किश्तवाड़ में 60 मौतें
इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई थी। इस हादसे में अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 200 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बीएसएफ के दो जवान भी शामिल थे। स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर लगातार बदलते मौसम और जलवायु संकट की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने न सिर्फ राहत-बचाव बल्कि स्थायी समाधान की राह तलाशने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।