
Kedarnath Yatra 2022 : केदारनाथ के कपाट खुलते ही पहले ही दिन दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड टूट गया है। पहले ही दिन केदारनाथ 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए हैं। दावा किया जा रहा है कि इससे पहले 2019 में 9 हजार भक्तों ने दर्शन किए थे। केदारपुरी में भक्तों की आस्था पहले से ही ज्यादा बढ़ती जा रही है।
दो साल तक कोविड के प्रतिबंध के कारण बाबा केदार के दर्शन करने से दूर रहे भक्तों को इस बार पूरा मौका मिल रहा है। जिस वजह से पहले ही दिन भक्तों के जय भोले से पूरी केदारपूरी गूंज उठी है। जिस तरह की उम्मीद लगाई जा रही थी, उसी अनुरूप भक्तों की संख्या धामों में पहुंच रही है। 3 मई से गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया। लेकिन सबसे ज्यादा उत्साह 6 मई को बाबा केदारनाथ के दर्शन को देखने को मिली। जहां पहले ही दिन करीब 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचने का दावा किया जा रहा है। जो कि एक रिकॉर्ड है। यहां एक दिन के लिए 12 हजार यात्रियों की संख्या का निर्धारण किया गया था।
हालांकि केदारधाम में 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की ही व्यवस्था एक दिन में हो सकती है। ऐसे में 2 गुना भक्त पहुंचने से एक बार फिर अव्यवस्थाएं ही नजर आ रही हैं। जिसके लिए बद्री-केदार मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाएं और बढ़ानी होंगी। जिससे आने वाले समय में धाम में यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
केदारपुरी में भक्तों की आस्था पहले से ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। जो कि आपदा के बाद ओर गहरी होती जा रही है। ऐसे में जब केदारनाथ का पुर्ननिर्माण हो रहा है, तो श्रद्धालु बाबा के दर्शन के साथ ही केदारपुरी को देखने आ रहे हैं। जिसमें ध्यान गुफा, शंकराचार्य की समाधि स्थल भी काफी लोकप्रिय होती जा रही है। केदारनाथ यात्रा पर आने वाले सभी भक्त आदिगुरू शंकराचार्य की समाधिस्थल को देखने पहुंच रहे हैं। यह स्थल 2013 में बह गया था। अब एक बार फिर से इसे तैयार किया गया है, जहां भक्त पहुंचकर साधना भी कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी भी इसी स्थल पर पहुंचकर ध्यान लगा चुके हैं।
केदारनाथ आने वाले श्रद्धालु नौ वर्ष बाद आदिगुरु शंकराचार्य समाधिस्थल के दर्शन कर रहे हैं। विशेष डिजायन व तकनीक के साथ निर्मित समाधिस्थल में आदिगुरु शंकराचार्य की 35 टन वजनी मूर्ति स्थापित की गई है, जिस पर मंदाकिनी व सरस्वती नदी का जल प्रवाहित हो रहा है। विशेष डिजायन व तकनीक से 16 करोड़ की लागत से निर्मित यह समाधि भूमिगत है, जो 38 मीटर गोलाकार व 6 मीटर गहरी है। इसमें प्रवेश व बाहर निकलने के लिए रैंप बनाई गई हैं।