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Kerala Results 2026 : 1957 में केरल में दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार बनी थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी वाम दलों ने लंबे समय तक शासन किया।

Kerala Results 2026 : भारतीय वामपंथ के लिए बड़ झटका है। दक्षिण के इस राज्य में सरकार गंवाने के बाद उनकी सत्ता का आखिरी किला भी ढह गया है। खबर लिखे जाने तक केरल के अंतिम नतीजे घोषित नहीं हुए हैं लेकिन यह पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार जाने वाली है इसमें अब कोई शक नहीं रह गया है। 1970 के बाद यह पहली बार होगा कि भारत के किसी भी राज्य में कम्युनिस्ट सत्ता में नहीं होंगे।
1957 में केरल में दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार बनी थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी वाम दलों ने लंबे समय तक शासन किया। 1990 के दशक में ज्योति बसु के नेतृत्व में बंगाल वामपंथ का गढ़ बन गया था। उस समय सीपीआई(एम) संसद में भी मजबूत ताकत थी।
भारत को मिलने वाला था कम्युनिस्ट पीएम
30 साल पहले ऐसा मौका भी आया जब भारत को एक कम्युनिस्ट पीएम मिल सकता था। CPI(M) तब यूनाइटेड फ्रंट का हिस्सा थी और बंगाल के तत्कालीन सीएम ज्योति बसु प्रधानमंत्री के तौर पर सबकी पंसद थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
2008 में जब वामपंथियों ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के मुद्दे पर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार से समर्थन वापस लिया था उस समय उसी तीन राज्यों - केरल, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में सरकार थी।
2011 के बाद शुरू हुआ नाकामियों का सिलिसिला
2011 में ममता बनर्जी ने बंगाल में वाम मोर्चे को करारी हार दी। 2018 में त्रिपुरा भी बीजेपी के हाथ चला गया। अब सिर्फ केरल बचा था, जहां पिनारयी विजयन ने 2016 और 2021 में सरकार बनाई थी। अब केरल में भी लेफ्ट की हार निश्चित है तो क्या ये मान लिया जाए कि भारत में अब वाम विचारधार इतिहास का विषय बन गई है।
यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि भूख, गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे आज भी देश के सामने हैं, लेकिन इन मुद्दों पर सबसे ज्यादा आवाज उठाने वाली विचारधारा अब सत्ता के नक्शे से लगभग गायब हो चुकी है।
देश में दक्षिणपंथी की बढ़ती पकड़ साफ दिख रही है। वामपंथ के पारंपरिक वोटर अब दूसरे विकल्पों की ओर जा रहे हैं। वाम मोर्चे के कार्यकर्ता और नेता इस हार को स्वीकार करने की मानसिक तैयारी में हैं, जबकि विपक्षी दलों में जश्न का माहौल है।
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