कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वोट चोरी, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और 2023 के कानून को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दिल्ली में पुलिस तैनाती और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर लोकतंत्र और मताधिकार से जुड़े मुद्दे उठाने की बात कही।

National News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, चुनावी पारदर्शिता और विपक्ष के प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर देश में अराजकता फैलाने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा और अब भारत के मुख्य न्यायाधीश के सामने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे उठाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान के बाद चुनाव आयोग की भूमिका और वर्ष 2023 में बनाए गए कानून को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। खड़गे का आरोप है कि चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर उठाए गए सवालों का समाधान नहीं किया जा रहा। कांग्रेस और विपक्षी दल इन आरोपों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और स्वतंत्र संस्था है, जिसे बिना किसी दबाव के निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए। उनके मुताबिक, आयोग के भीतर कामकाज और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन इन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के जरिए केंद्र तथा राज्यों में सरकारें बनाने का रास्ता तैयार किया गया। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और चुनावी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र और जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। हालांकि, वोट चोरी और चुनावी धांधली से जुड़े इन आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष के आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले वर्ष 2023 के कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को व्यापक सुरक्षा दी गई, जिससे उनकी जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 16 आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के संबंध में कानूनी संरक्षण का प्रावधान करती है। इस प्रावधान को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आया है। खड़गे का कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था के पदाधिकारियों की स्वतंत्रता के साथ उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयुक्तों को विशेष कानूनी संरक्षण देने की जरूरत क्यों पड़ी। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी गड़बड़ियों के सवालों पर कार्रवाई नहीं होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है। इस मामले में सरकार का पक्ष और कानून की न्यायिक व्याख्या भी महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि विपक्षी नेता भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति पर अपनी चिंताएं रखेंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पत्र लिखा गया है और प्रस्तावित मुलाकात में पूरे मामले से न्यायपालिका को अवगत कराया जाएगा। खड़गे के मुताबिक, विपक्ष मुख्य न्यायाधीश से कोई मांग थोपना नहीं चाहता, बल्कि हाथ जोड़कर अपनी बात रखेगा और मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध करेगा। उनका कहना है कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना सभी संवैधानिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की ओर से 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध मार्च आयोजित करने तथा वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की योजना भी सामने आई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश में अराजकता पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसी स्थिति के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। खड़गे ने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगभग 32 हजार पुलिसकर्मी और 7,500 सीआरपीएफ जवान तैनात किए गए थे। उनके अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से पता चलता है कि सरकार युवाओं के आंदोलन को लेकर चिंतित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर अवरोध लगाए गए, संचार व्यवस्था प्रभावित हुई, हवाई अड्डे तक पहुंचने में बाधाएं आईं और मोबाइल नेटवर्क बंद किए गए। खड़गे ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की। इन आंकड़ों और व्यवस्थाओं से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पुलिस और प्रशासन का पक्ष भी पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
खड़गे ने कहा कि युवा अपने वोट और लोकतंत्र को बचाने के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बजाय उनके अधिकारों को दबाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस इन मुद्दों पर न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी चिंताएं रखने की तैयारी कर रही है। अब 12 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध मार्च और मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के दौरान विपक्ष किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है, इस पर नजर रहेगी। इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का पक्ष तथा सामने आने वाले प्रमाण आगे की बहस के लिए अहम होंगे।
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