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KCC New Rule: फसल सीजन की नई परिभाषा को आय मान्यता और संपत्ति वर्गीकरण (IRAC) मानदंडों के अनुरूप तैयार किया गया है। इससे देशभर में कृषि ऋण से जुड़े नियमों को एक समान तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

देश के करोड़ों किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना के कुछ नियमों में बदलाव किया है। इन नए नियमों का उद्देश्य कृषि ऋण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है ताकि किसानों और बैंकों दोनों के लिए नियमों में एकरूपता बनी रहे। आरबीआई द्वारा किए गए ये बदलाव जनवरी 2026 से लागू होंगे। इस बार फसल सीजन की परिभाषा को नए तरीके से तय किया गया है जिससे ऋण स्वीकृति और उसके पुनर्भुगतान की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो जाएगी।
आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए फसल सीजन की परिभाषा को मानकीकृत किया है। अब अल्पकालिक फसलों के लिए फसल सीजन 12 महीने और दीर्घकालिक फसलों के लिए 18 महीने माना जाएगा। फसल सीजन का मतलब उस पूरी अवधि से है जिसमें किसान फसल की बुवाई करता है, उसकी देखभाल करता है, फसल की कटाई होती है और फिर उसे बाजार में बेचने तक की प्रक्रिया पूरी होती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बैंकों के लिए ऋण की समय-सीमा तय करना और किसानों के लिए भुगतान की योजना बनाना आसान हो सकता है।
आरबीआई का कहना है कि फसल सीजन की नई परिभाषा को आय मान्यता और संपत्ति वर्गीकरण (IRAC) मानदंडों के अनुरूप तैयार किया गया है। इससे देशभर में कृषि ऋण से जुड़े नियमों को एक समान तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। अब विभिन्न क्षेत्रों और फसलों के अनुसार अलग-अलग व्याख्याओं की जगह एक निश्चित मानक लागू होगा। इससे बैंकों को भी ऋण खाते का आकलन करने में आसानी होगी और किसानों को भी नियमों को समझने में कम परेशानी होगी।
किसान संगठनों और कुछ पक्षों की ओर से बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी। हालांकि आरबीआई ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा दिसंबर 2024 में ही बढ़ाई जा चुकी है और फिलहाल इसे और बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। इसलिए मौजूदा व्यवस्था में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है।
आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को प्रति उधारकर्ता दो लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर गारंटी सुरक्षा और मार्जिन की शर्त समाप्त कर देनी चाहिए। इसमें खेती के साथ-साथ कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए दिए जाने वाले ऋण भी शामिल हैं। इस फैसले से छोटे और सीमांत किसानों को राहत मिल सकती है क्योंकि उन्हें कम दस्तावेजी औपचारिकताओं के साथ ऋण प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
नए नियमों के अनुसार, यदि किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिया गया ऋण फसल या स्टॉक को गिरवी रखकर लिया गया है तो बैंक तीन लाख रुपये तक के ऋण के लिए अतिरिक्त संपत्ति गिरवी रखने की शर्त में छूट दे सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित बैंक अपनी आंतरिक नीतियों और क्रेडिट पॉलिसी के अनुसार ले सकेंगे। इससे किसानों को ऋण लेने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल लग सकती है।
आरबीआई ने बैंकों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपनी क्रेडिट पॉलिसी के अनुसार फसल उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए दी जाने वाली अल्पकालिक ऋण सीमा की नियमित समीक्षा और नवीनीकरण करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार समय पर ऋण सुविधा मिलती रहे और कृषि कार्यों में वित्तीय बाधा न आए।
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