अमित शाह और सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा ने परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। परियोजना के जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाएगी।

National News : लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर आखिरकार बड़ा रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा ने किशाऊ परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ करीब तीन दशक से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। इस समझौते के बाद उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक पानी मिलेगा। इसके अलावा दिल्ली को 105.28 क्यूसेक, हरियाणा को 836 क्यूसेक तथा राजस्थान को 163.52 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस समझौते के तहत 660 मेगावॉट बिजली के उत्पादन तथा 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। समझौते के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। National News
किशाऊ परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा। इस बांध में करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित किया जा सकेगा। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होने की उम्मीद है। इसके अलावा लगभग 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन भी किया जा सकेगा। National News
किशाऊ परियोजना को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। परियोजना के वित्तीय भार का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 में हुए समझौते के अनुसार संबंधित राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड की वित्तीय कठिनाइयों को देखते हुए केंद्र सरकार उसकी मांगों को अपनी योजनाओं में शामिल करने और भविष्य में वित्तीय भार उठाने में मदद करने का प्रयास करेगी। National News
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह से जुड़ा है। अमित शाह ने कहा कि यमुना के जल बंटवारे के दौरान उसके पर्यावरणीय प्रवाह को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया था। किशाऊ परियोजना से मिलने वाले पानी में से 25 प्रतिशत पानी यमुना के लिए उपलब्ध होगा। इससे दिल्ली की जल जरूरतों के साथ-साथ यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। अमित शाह ने कहा कि यमुना की स्वच्छता का सीधा संबंध गंगा की स्वच्छता से भी है, क्योंकि यमुना प्रयागराज में गंगा में मिलती है। ऐसे में यमुना के संरक्षण को गंगा की स्वच्छता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। National News
गृह मंत्री अमित शाह ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि छह राज्यों का एक साथ सहमत होना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय जल विवादों को समाप्त करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच कई महत्वपूर्ण जल विवादों और परियोजनाओं से जुड़े मतभेदों को सुलझाया गया है। किशाऊ परियोजना पर बनी सहमति भी इसी प्रयास की महत्वपूर्ण कड़ी है। केंद्र सरकार और छहों राज्यों ने परियोजना को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके पूरा होने के बाद पेयजल, सिंचाई, जलविद्युत और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। National News
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