देश में हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम और राष्ट्रीय नारे पर हुई चर्चा के बाद एक सवाल तेजी से उभरकर सामने आया है।

बता दें कि “भारत माता की जय का नारा सबसे पहले किसने दिया?” इसका जवाब जानकर बहुत-से लोग हैरान रह जाते हैं, क्योंकि यह नारा 165 साल पहले एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी अजीमुल्ला खान ने दिया था।
बता दें कि अजीमुल्ला खान 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख योजनाकारों में से एक थे। वे बिठूर में नाना साहब पेशवा द्वितीय के दीवान और सबसे भरोसेमंद सलाहकार थे। यूरोप की राजनीतिक संस्कृति को करीब से देखने के बाद उनमें राष्ट्रवाद की प्रबल भावना जागी और भारत लौटकर उन्होंने विद्रोह की वैचारिक नींव तैयार करना शुरू किया।
इतिहासकारों के अनुसार, अजीमुल्ला खान ने पहली बार “भारत माता की जय” को एक देशभक्ति नारे के रूप में इस्तेमाल किया था। कुछ शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि यह नारा उर्दू वाक्यांश ‘मादरे वतन हिंदुस्तान जिंदाबाद’ से प्रेरित रहा होगा। 2024 में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी सार्वजनिक मंच पर अजीमुल्ला खान को इस नारे का जनक बताया था।
अजीमुल्ला खान को 1857 के विद्रोह का बड़ा रणनीतिक दिमाग कहा जाता है। वह फ्रंटलाइन पर कम दिखे, लेकिन उनकी योजना और राजनीति ने विद्रोह की दिशा तय की।
बता दें कि उत्तरी भारत का दौरा कर गठबंधन मजबूत किए थे, उपनिवेशवाद के खिलाफ भावनाओं को एकजुट किया थे, रणनीतिक स्तर पर विद्रोही गतिविधियों का समन्वय किया। ‘पयाम-ए-आजादी’ नामक क्रांतिकारी अखबार शुरू किया, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक शक्तिशाली आवाज बना और कानपुर की घेराबंदी के दौरान सर ह्यू व्हीलर से वार्ता सहित महत्वपूर्ण रणनीतिक भूमिकाएँ निभाईं है। लंदन में नाना साहब की पेंशन याचिका अस्वीकार होने के बाद जब वे भारत लौटे, तो अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ उन्होंने व्यापक जनसमर्थन तैयार किया, जिसने विद्रोह को और धार दी।
बता दें कि आज जब “भारत माता की जय” देश का प्रमुख राष्ट्रवादी नारा बन चुका है, यह जानना महत्वपूर्ण है कि इसे एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी ने गढ़ा था, जिसने धर्म से ऊपर उठकर देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। अजीमुल्ला खान की वीरता, दूरदर्शिता और राष्ट्रवाद की भावना भारत के स्वतंत्रता इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।