अमेरिका के इतिहास में 1916 की गर्मियाँ हमेशा के लिए एक खतरनाक याद बन गईं, जब न्यू जर्सी के शांत समुद्री तट पर शार्क के लगातार हमलों ने पूरे देश को दहशत में डाल दिया था।

बता दें कि चौथी जुलाई (संयुक्त राज्य अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस) की छुट्टियों के बीच लोग युद्ध और महामारी की चिंताओं से दूर समुद्र किनारे सुकून तलाश रहे थे, लेकिन उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि समुद्र से आने वाला एक नया खतरा उनका इंतज़ार कर रहा है।
बता दें कि 1 जुलाई 1916 को 25 वर्षीय चार्ल्स वैनसेंट शाम के भोजन से पहले समुद्र में तैरने उतरे। अचानक उथले पानी में एक काला पंख दिखाई दिया और देखते ही देखते शार्क ने उनके पैर को जकड़ लिया। बीच पर मौजूद लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी। उन्हें गंभीर हालत में एंगलसाइड होटल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई। उस समय वैज्ञानिक मानते थे कि शार्क इंसानों पर हमला नहीं करतीं। इस घटना को भी कई विशेषज्ञ "दुर्लभ संयोग" बताने लगे।
5 जुलाई को स्प्रिंग लेक के तट पर 27 वर्षीय चार्ल्स ब्रूडर पर शार्क ने हमला कर दोनों पैर बुरी तरह काट दिए। लाइफगार्ड्स ने उन्हें खून से लथपथ अवस्था में बाहर निकाला, लेकिन डॉक्टर भी उनकी जान नहीं बचा पाए। हमलों को लेकर विशेषज्ञों में भ्रम बढ़ता गया—किसी ने किलर व्हेल को जिम्मेदार बताया, तो कुछ ने विशाल टूना या समुद्री कछुए को।
12 जुलाई को 96 डिग्री तापमान के बीच 11 वर्षीय लेस्टर स्टिलवेल मटावन क्रीक में अपने दोस्तों के साथ नहा रहा था। यह स्थान समुद्र से एक मील अंदर था, इसलिए यहाँ शार्क का होना कोई सोच भी नहीं सकता था। लेकिन अचानक बच्चा पानी में गायब हो गया। उसे बचाने दौड़े 24 वर्षीय स्टेनली फिशर पर भी शार्क ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। फिशर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। कुछ ही देर बाद 12 वर्षीय जोसेफ डन पर भी हमला हुआ, हालांकि वह जीवित बच गया।
लगातार होती मौतों से लोग इतने डर गए कि भीड़ ने भाले, बंदूकों और यहाँ तक कि डायनामाइट से शार्क को मारने की कोशिश की। राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने कैबिनेट बैठक बुलाकर “शार्क के आतंक” को रोकने का आदेश दिया। तटरक्षक बल को भी इस मिशन पर लगाया गया। 12 जुलाई की रात माइकल श्लेइसर नामक शिकारी ने रैरिटन खाड़ी में एक बड़ी शार्क मार गिराई। इसके पेट से कथित तौर पर मानव हड्डियाँ मिलने का दावा किया गया। हालांकि यह साबित नहीं हो सका कि यही वही शार्क थी, लेकिन इसके बाद हमले रुक गए।
इन घटनाओं ने अमेरिका में शार्क के प्रति धारणा को पूरी तरह बदल दिया। जो जीव पहले “शर्मीली मछलियों” के रूप में जाने जाते थे, वे अब डर का प्रतीक बन गए। 1916 की यह श्रृंखला आज भी इतिहास के सबसे भयावह शार्क हमलों में गिनी जाती है।