
इस साल के उपराष्ट्रपति चुनाव ने राजनीतिक हलकों में गर्माहट पैदा कर दी है। एनडीए के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन, तमिलनाडु के अनुभवी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल, अपनी रणनीति और अनुभव के दम पर मैदान में हैं। वहीं, विपक्ष के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी, आंध्र प्रदेश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज, न्यायिक विशेषज्ञता और निष्पक्ष छवि के साथ मुकाबले में हैं। यह चुनाव केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के दो प्रभावशाली नेताओं के बीच सीधी टक्कर बन गया है। स्वतंत्रता के बाद 1952 में पहले चुनाव के बाद से उपराष्ट्रपति पद हमेशा गरिमा और सम्मान का प्रतीक रहा है, लेकिन इस बार इसे राजनीतिक रोमांच और नेतृत्व की चुनौती ने और दिलचस्प बना दिया है। Vice Presidential Election 2025
इतिहास बताता है कि केंद्र में सत्ता में रहने वाली पार्टी के उम्मीदवारों को अधिकतर जीत मिली है।
1997: जनता दल के कृष्ण कांत 441 वोट (61.76%) से विजयी हुए।
2002: बीजेपी के भैरोंसिंह शेखावत 454 वोट (59.82%) से सुशील कुमार शिंदे को हराया।
2007: कांग्रेस के मोहम्मद हामिद अंसारी 455 वोट (60.50%) से जीते।
2012: हामिद अंसारी ने 490 वोट (67.31%) से जसवंत सिंह को हराया।
2017: बीजेपी के वेंकैया नायडू 516 वोट (67.89%) से जीत हासिल की।
2022: जगदीप धनखड़ ने 528 वोट (74.37%) से रिकॉर्ड जीत दर्ज की।
1952 और 1957: सर्वपल्ली राधाकृष्णन
1969: गोपाल स्वरूप पाठक
1979: मोहम्मद हिदायतुल्लाह
1987: शंकर दयाल शर्मा
इस बार भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में बहुमत की संभावना है। संसद के दोनों सदनों में बीजेपी के पास स्पष्ट बढ़त है। कुल 782 योग्य मतदाताओं में जीत के लिए 392 वोट जरूरी हैं। एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 133 सीटें हैं, यानी क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो 426 वोट उनके पक्ष में हैं। विपक्ष की संभावनाएँ सीमित हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त थी, जबकि नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 25 अगस्त थी। यह चुनाव जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद आयोजित किया जा रहा है। Vice Presidential Election 2025