
Kolkata : कोलकाता की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक अंतरराष्ट्रीय संस्था 'रचनाकार' ने हिंदी ग़ज़ल के प्रकाश स्तंभ दुष्यंत कुमार की पुण्य तिथि के अवसर पर एक शाम दुष्यंत के नाम, दीक्षित दनकौरी के साथ शीर्षक से अपना दूसरा भव्य अधिवेशन पश्चिम बंग बंगला साहित्य अकादमी सभागार में आयोजित किया।
इस कार्यक्रम में देश - विदेश से 30 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर 11लेखकों को 'रचनाकार साहित्य शिरोमणि सम्मान', 15 साहित्यकारों को 'रचनाकार साहित्य शिखर' एवं 25 रचनाकारों को ' रचनाकार साहित्य सम्मान' प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रचनाकार 'सहित्यगन्धा प्रज्ञा सम्मान' शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) सोमा बंदोपाध्याय को दिया गया जिसमे 31000 रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र शाल दिया गया, दूसरा सम्मान कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में प्रसिद्ध रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला जी को दिया गया, जिसमें 'रचनाकार सुरभि कला विभूति सम्मान' 21000 नगद, प्रशस्ति पत्र एवं शाल तीसरा पुरस्कार 'रचनाकार दुर्गावति चौधरी स्मृति सम्मान' 11000 रुपये नगद प्रशस्ति पत्र इत्यादि दिल्ली की प्रसिद्ध कवयित्री अनुराधा पांडेय को दिया गया।
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इस वर्ष से 3 सम्मान रामधारी सिंह दिनकर जी के पारिवारिक न्यास के सौजन्य से दिए गए। 'श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान' पटना के श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी 'श्रेष्ठ साहित्य साधक' श्री यतीश कुमार एवं राजस्थानी भाषा के लिए 'श्रेष्ठ साहित्यकार' रतन शाह को दिया गया। कार्यक्रम का समापन एक शाम दुष्यंतकुमार की स्मृति शेष को समर्पित मुशायरे से हुआ जिसकी अध्यक्षता दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी ने की। भूपेंद्र सिंह 'होश', विजय स्वर्णकार, डा. विनोद प्रकाश गुप्ता 'शलभ', नंदलाल रोशन, ज्ञान प्रकाश पांडे ने शानदार गज़लें पढ़ी। इस मुशायरे के केंद्र बिंदु, विश्वविख्यात ग़ज़लकार दीक्षित दनकौरी ने अपने ग़ज़ल पाठ से हॉल में उपस्थित सैकड़ों श्रोताओं का मन मोह लिया।
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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रख्यात समाजसेविका प्रियदर्शिनी हकीम, एवं ताज़ा टीवी के प्रबंध निर्देशक श्री विश्वम्भर नेवर रहे। कार्यक्रम में पटना की आराधना प्रसाद, कोलकाता के रामनाथ 'बेखबर' एवं नॉर्वे के सुरेश चंद्र मिश्र की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। उमा झुनझुनवाला ने प्राप्त पुरस्कार राशि को संस्था को साहित्य के कार्य के लिए वापस किया। प्रो. सोमा बंदोपाध्याय ने घोषणा की कि वे अगले वर्ष से एक सम्मान प्रायोजित करेंगी। अंत में संस्थापक अध्यक्ष सुरेश चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और आश्वत किया कि संस्था इसी प्रकार साहित्य एवं संस्कृति के उत्थान में लगी रहेगी।