कम पानी और कम लागत में बंपर मुनाफा! मसूर की खेती कैसे करें, जानें एक्सपर्ट से

मसूर की बुवाई के लिए बलुई दोमट या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। पलेवा करके 2 से 3 जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है।

Lentil cultivation
मसूर की उन्नत और नई प्रजातियां (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Mar 2026 11:18 AM
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Lentil cultivation : भारतीय रसोई में मसूर की दाल का अपना एक अलग स्थान है। पौष्टिक होने के साथ-साथ यह दाल आम जनमानस की पहुंच में भी आसानी से आ जाती है। जहां एक तरफ यह अन्य दालों के मुकाबले सस्ती पड़ती है, वहीं इसके सेवन से सेहत को भी कई फायदे मिलते हैं। मसूर में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम और लोहा जैसे जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

खाने के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी मसूर की फसल किसी वरदान से कम नहीं है। यह उन इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है जहां पानी की कमी हो। मसूर में सूखा सहन करने की अद्भुत क्षमता होती है। इसके अलावा, यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और मृदा क्षरण रोकने में भी मददगार साबित होती है। आइए, जानते हैं सीनियर साइंटिस्ट डॉ. ज्योति कुमारी की राय से कि किस तरह कम लागत में मसूर की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

कैसे करें खेत की तैयारी?

मसूर की बुवाई के लिए बलुई दोमट या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। पलेवा करके 2 से 3 जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे बीजों का जमाव बेहतर होता है। खेत में मौजूद खरपतवार और पिछली फसल के अवशेषों को साफ कर देना चाहिए।

बुवाई का सही समय और तरीका

अच्छी पैदावार के लिए समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अक्तूबर का आखिरी हफ्ता मसूर की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, हालांकि नवंबर के दूसरे हफ्ते तक भी बुवाई की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि देसी हल के मुकाबले सीडड्रिल से बुवाई करने पर उत्पादन अधिक मिलता है। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और निराई-गुड़ाई भी आसान हो जाती है।

नई प्रजातियां और बीजोपचार

किसान मसूर की उन्नत प्रजातियों जैसे लेंस 4076, डीपीएल 15, पूसा वैभव, डीपीएल 62, जेएल 3, आईपीएल 81, केएलएस 218, एचयूएल 57 और वीएल 507 का चयन कर सकते हैं। बीजों को बोने से पहले जरूर बीनोमाइल 0.3 प्रतिशत से उपचारित करना चाहिए। अगर किसी खेत में पहली बार मसूर की खेती हो रही हो, तो राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल जरूर करें। इससे जड़ों में गांठें बनती हैं और पैदावार बढ़ती है।

उर्वरकों का सही इस्तेमाल

मसूर दलहनी फसल होने के कारण कम मात्रा में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। प्रति हेक्टेयर 15-20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50-60 किलोग्राम फास्फोरस और 30-40 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करें। जिन इलाकों में जिंक की कमी हो, वहां 2.5 किलोग्राम जिंक सल्फेट और सल्फर की जरूरत होने पर 30 किलोग्राम सल्फर का इस्तेमाल लाभदायक रहता है।

कीट नियंत्रण और कटाई

मसूर में कीड़ों का प्रकोप कम होता है, लेकिन जनवरी में तापमान बढ़ने पर माहू का खतरा रहता है। इसके लिए डाइमिथोएट 0.03 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए। वहीं, कटाई का सही समय तब होता है जब 70 से 80 फीसदी फलियां सूखने लगें। समय पर कटाई करने से दानों का झड़ना रुकता है और गुणवत्ता बनी रहती है। Lentil cultivation

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बिहार:पत्नियों से बदले की आग में मर्यादा भूले पति,गिरफ्तार

पति कमलेश महतो को पता चला कि उनकी पत्नी के वीडियो वायरल किए गए हैं, उन्होंने गुस्से में आकर एक और अपराध किया। बदले की भावना में कमलेश ने आरोपी राम सुजीत शर्मा की पत्नी के फोटो पर आपत्तिजनक शब्द लिखकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए।

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दरभंगा पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Mar 2026 08:39 PM
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Bihar News: बिहार के दरभंगा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो युवकों ने एक-दूसरे से बदला लेने के लिए उनकी पत्नियों के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। साइबर थाना पुलिस ने इस गंभीर मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, मामला ईर्ष्या और बदले की भावना का है। मनीगाछी थाना क्षेत्र के रहने वाले आरोपी राम सुजीत शर्मा ने कुछ समय पहले एक अविवाहित युवती से वीडियो कॉल के दौरान बातचीत की और धोखे से उसके आपत्तिजनक फोटो व वीडियो बना लिए। इसके बाद वह उस युवती को ब्लैकमेल करने लगा और शादी न करने की धमकी देने लगा। जब नवंबर 2025 में उस युवती की शादी सकतपुर थाना क्षेत्र के निवासी कमलेश महतो के साथ हो गई, तो आरोपी राम सुजीत ने उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिए।

पति ने लिया बदला, पत्नी बनी निशाना

जैसे ही पति कमलेश महतो को पता चला कि उनकी पत्नी के वीडियो वायरल किए गए हैं, उन्होंने गुस्से में आकर एक और अपराध किया। बदले की भावना में कमलेश ने आरोपी राम सुजीत शर्मा की पत्नी के फोटो पर आपत्तिजनक शब्द लिखकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए। इस तरह, दोनों पुरुषों ने अपनी-अपनी ईर्ष्या और गुस्से का बदला एक-दूसरे की पत्नियों की बदौलत लिया।

पुलिस की कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में जब दोनों पक्षों की पत्नियां परेशान होकर साइबर थाना पहुंचीं और एक-दूसरे के पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया, तो पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। साइबर डीएसपी विपिन बिहारी ने बताया कि दोनों शिकायतों की जांच के बाद छापेमारी कर राम सुजीत शर्मा और कमलेश महतो दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में पेश करने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस का संदेश

साइबर डीएसपी ने इस मामले पर कहा कि देश में विश्व महिला दिवस मनाए जाने के बीच महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के खिलाफ ऐसी घटनाएं चिंताजनक हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी की भी आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।Bihar News

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ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन का कैसे करें? चारधाम यात्रा का फुल गाइड

Chardham Yatra Registration: जैसे-जैसे 2026 की यात्रा का समय नजदीक आ रहा है लोग यह जानने में रुचि रखते हैं कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, कब शुरू होगा और कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी। इस आर्टिकल में हम आपको पूरी प्रक्रिया, तारीखें और जरूरी जानकारी विस्तार से बता रहे हैं।

Chardham Yatra
Chardham Yatra 2026 Registration
locationभारत
userअसमीना
calendar09 Mar 2026 03:31 PM
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उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव लेकर आती है। जैसे-जैसे 2026 की यात्रा का समय नजदीक आ रहा है लोग यह जानने में रुचि रखते हैं कि रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, कब शुरू होगा और कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी। इस आर्टिकल में हम आपको पूरी प्रक्रिया, तारीखें और जरूरी जानकारी विस्तार से बता रहे हैं।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 6 मार्च की सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप घर बैठे आसानी से अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवल उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक पर्यटन पोर्टल या मोबाइल एप का इस्तेमाल करना होगा। पहले अपने मोबाइल नंबर की मदद से अकाउंट बनाएं। उसके बाद अपनी व्यक्तिगत जानकारी और यात्रा विवरण भरें। सभी जानकारी सही भरने के बाद फॉर्म सबमिट करें और रजिस्ट्रेशन पर्ची डाउनलोड कर लें। यात्रा के दौरान यह पर्ची आपके साथ रखना अनिवार्य है।

ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की जानकारी

जो श्रद्धालु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाते उनके लिए ऑफलाइन पंजीकरण का विकल्प भी है। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन 17 अप्रैल से शुरू होगा, जो यात्रा आरंभ होने से केवल दो दिन पहले का समय है। राज्य के प्रमुख शहरों में रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाए जाएंगे। श्रद्धालु ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून में जाकर सीधे अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

चारधाम मंदिरों के खुलने की तारीखें

चारधाम यात्रा के दौरान मंदिरों का समय और तारीख जानना भी बेहद जरूरी है। 2026 में मंदिरों के खुलने की तारीखें इस प्रकार हैं-

गंगोत्री मंदिर- 19 अप्रैल

यमुनोत्री मंदिर- 19 अप्रैल

केदारनाथ मंदिर- 22 अप्रैल

बद्रीनाथ मंदिर- 23 अप्रैल

ये तारीखें ध्यान में रखकर यात्रा की प्लानिंग करना श्रद्धालुओं के लिए आसान होगा।

रजिस्ट्रेशन फीस और हेलीकॉप्टर सुविधा

उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह से फ्री रखती है। इसका मतलब है कि रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आपको कोई शुल्क नहीं देना होगा। यदि आप केदारनाथ तक हेलीकॉप्टर से जाने का सोच रहे हैं तो किराया लगभग 6,000 से 9,000 रुपये प्रति व्यक्ति हो सकता है। हेलीकॉप्टर बुकिंग आप केवल संबंधित ऑपरेटरों के माध्यम से कर सकते हैं।

यात्रा के लिए तैयारियों के टिप्स

चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ यात्रा की पूरी तैयारी भी जरूरी है। यह सुनिश्चित करें कि आपकी सभी व्यक्तिगत और हेल्थ डिटेल्स सही भरें। साथ ही मौसम और पहाड़ी रास्तों की जानकारी रखें। यात्रा से पहले हल्का बैग, पर्याप्त पानी और आरामदायक जूते जरूर रखें। चारधाम यात्रा सिर्फ आध्यात्मिक अनुभव नहीं बल्कि आपकी जीवन की यादगार यात्रा भी बन सकती है। सही समय पर रजिस्ट्रेशन और व्यवस्थित तैयारी से यह अनुभव सुरक्षित और सुखद रहेगा।

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